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यूपी में पकड़े छह आरोपियों का सनसनीखेज खुलासा, RTO-ARTO कराते थे ओवरलोड ट्रकों से वसूली

Sun, 26 Jan 2020 11:29 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश में ओवरलोड ट्रकों से वसूली के मामले में गोरखपुर के एआरटीओ एसपी श्रीवास्तव, कुशीनगर के एआरटीओ संदीप कुमार पंकज, संत कबीर नगर के एआरटीओ केएन सिंह, देवरिया के आरटीओ चतुर्वेदी समेत कई अन्य जिलों के परिवहन अफसरों के नाम उजागर हुए हैं।
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इस मामले में शुक्रवार को बेलीपार थाने में दर्ज एफआईआर में इन सभी अफसरों के नाम शामिल हैं। जांच आगे बढ़ी तो परिवहन विभाग के कई और अफसरों पर गाज गिर सकती है।

एसटीएफ की शुरुआती जांच में सामने आया है कि जांच के घेरे में आए अफसर अपने सगे संबंधियों की मदद से वसूली कराते थे। उधर, एसटीएफ ने शुक्रवार को गिरफ्तार किए गए मधुबन होटल के मालिक धर्मपाल सिंह समेत छह लोगों को बेलीपार पुलिस को सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने एसटीएफ के इंस्पेक्टर एसपी सिंह की तहरीर पर केस दर्ज कर सभी आरोपितों को कोर्ट में पेश कर शनिवार को जेल भेज दिया।  
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जानकारी के मुताबिक एसटीएफ  ने गाड़ियों की ओवरलोडिंग कर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाने वाले एक गैंग के छह सदस्यों को शुक्रवार को बेलीपार के मधुबन होटल से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार होने वालों में मधुबन होटल मालिक व बेलीपार के मेहरौली निवासी धर्मपाल सिंह पुत्र स्वर्गीय राम सिंह, मनीष सिंह उर्फ  सिब्बू सिंह पुत्र बम बहादुर सिंह, विवेक सिंह उर्फ  सिक्कू सिंह पुत्र स्व. लाट बहादुर सिंह, श्रवण कुमार गौड़ पुत्र सोमई प्रसाद, रामसजन पुत्र राम देव तथा देवरिया जिले के कपरवारघाट निवासी शैलेश मल्ल पुत्र श्रशिकेश्वर मल्ल शामिल थे।

बकौल एटीएफ धर्मपाल सिंह उर्फ  डीपी सिंह ओवरलोड गाड़ियों को एंट्री कराने वाले किंग के रूप में जाना जाता है। सोनभद्र से ही इसका सिक्का चलता था, आरटीओ के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से पूरा रैकेट चल रहा था। मामले में गोरखपुर के एआरटीओ एसपी श्रीवास्तव का पक्ष नहीं मिल सका है, जब भी उनका पक्ष आएगा उसे प्रकाशित किया जाएगा।

जांच आगे बढ़ी तो फंसेंगे की कई और अफसर

आरटीओ गाजीपुर राम सिंह यादव, एआरटीओ आजमगढ़ संतोष सिंह का नाम भी सामने आया है। पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो प्रदेश के कई और जिलों के आरटीओ गिरफ्ते में होंगे।

अफसरों के अलावा आजमगढ़ के सिपाही ऋषिकेश मालवीय, भदोही के सिपाही योगेंद्र सिंह, भदोही के आनंद सिंह, चंदौली के दुर्गा श्रीवास्तव, मऊ के चंद्र प्रकाश यादव, मिर्जापुर के केके तिवारी, अनिल यादव, सीपी सिंह, सोनभद्र के मनोज सिंह, वाराणसी के नृपेंद्र और देवेंद्र सिंह, गाजीपुर के दुर्गविजय सिंह, संत कबीर नगर के राजेश यादव, मिर्जापुर के सोनू सिंह, गोरखपुर के संजय सिंह, अनूप सिंह, बबूल सिंह, मऊ के अवधेश प्रसाद का नाम भी सामने आया है।

24 पन्ने की फर्द लिख दर्ज कराई एफआईआर
गिरोह और उनके साथ जुड़ों लोगों तथा बरामद सामानों को एफआईआर में दिखाने के लिए एसटीएफ  को 24 पन्ने की फर्द बनानी पड़ी। फर्द लिखने के बाद शुक्रवार आधी रात को एसटीएफ  ने बेलीपार थानेदार को सुपुर्द किया, वहीं थाने की जीडी में एफआईआर दर्ज होते-होते सुबह हो गई।
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इतनी हो सकती है सजा
धारा 419, 420 : धोखाधड़ी  (सजा तीन साल व जुर्माना)
धारा 398 : गलत काम के दौरान घातक हमला (सजा 7 साल)
भ्रष्टाचार निवारण : पांच साल या उससे अधिक की सजा
धारा 406 : विश्वास का आपराधिक हनन  (सजा 3 साल)
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रिश्तेदार और सिपाहियों की मदद से कराते थे वसूली

अफसर रिश्तेदार और सिपाहियों की मदद से वसूली कराते थे। वहीं, कुछ ने तो अपने प्राइवेट लोगों को इस काम के लिए रख लिया था। संतकबीरनगर के एआरटीओ केएन सिंह पर अपने भांजे बबलू सिंह से वसूली कराने के आरोप हैं।

इसके अलावा अन्य अफसर अपने सिपाहियों और प्राइवेट लोगों से वसूली कराते थे। इस सिलसिले में संतकबीरनगर के एआरटीओ का पक्ष नहीं मिल सका है, जब भी उनका पक्ष आएगा उसे प्रकाशित किया जाएगा।  

कोट::
मेरा इससे दूर दूर तक कोई संबंध नहीं है। जांच में सच्चाई उजागर हो जाएगी।
राजीव चतुर्वेदी, एआरटीओ देवरिया

उनका या विभाग का दलालों से कोई संबंध नहीं रहा है। ओवरलोड गाड़ियों पर लगातार कार्रवाई की गई है। जांच में सारी बातें साफ हो जाएंगी।
संदीप कुमार पंकज, एआरटीओ, कुशीनगर

ओवरलोड ट्रकों से संबंधित मालिकों पर कार्रवाई की जाती है। अप्रैल से दिसंबर के बीच 1550 ट्रकों का चालान किया गया । साथ ही विभिन्न थानों में 275 ट्रकें बंद हैं। ओवरलोड ट्रकों से वसूली के मामले में एआरटीओ प्रवर्तन के संलिप्तता की जानकारी अभी मुझे नहीं है। अगर एआरटीओ की संलिप्तता पाई जाती है तो विभाग की ओर से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
डीडी मिश्रा, आरटीओ प्रवर्तन गोरखपुर
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