चंदा निषाद ने दुश्मन की आंख जैसे कमजोर अंगों पर हमला करने की सीख दी। टीम में शिवम मौर्य, अमन शर्मा, सनी सिंह, अंजलि गुप्ता शामिल रहे। आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर के प्रति छात्राओं में उत्साह और खुशी नजर आई, सबने मनोयोग से गुर सीखे। कार्यक्रम उप प्रधानाचार्य रश्मि श्रीवास्तव, डॉ. अर्चना शुक्ला, शालिनी सिंह, अर्चना त्रिपाठी, शालिनी सिंह, अनामिका शर्मा, सीमा मिश्रा, संध्या उपाध्याय, कालिंदी प्रकाश, दीपा श्रीवास्तव, अर्चना पाठक, नम्रता पांडेय, प्रियंका श्रीवास्तव और अंजलि पांडेय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बेटियों को सशक्त बनाने में अमर उजाला फाउंडेशन का यह अभियान मील का पत्थर साबित होगा। छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर भी सीखने चाहिए। -सरोज गुप्ता, प्रधानाचार्य सरस्वती बालिका विद्यालय, सूरजकुंड।
ताइक्वांडो के दांवपेंच सीख कर उत्साहित हूं। अब निडर होकर कहीं भी जा सकती हूं। अराजकतत्वों को कैसे सबक सिखाना है, आज मैंने सीख लिया है। -आर्या मानिक, कक्षा नौ।
प्रशिक्षण में आत्मरक्षा के तरीकों के साथ सीखा कि एकता में ही बल है। अब किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपट सकने का आत्मविश्वास है।
-श्रेया यादव, कक्षा ग्यारह।
ट्रेनिंग से सीखा कि किसी भी परिस्थिति में हतोत्साहित नहीं होना है, धैर्य और चपलता से किसी भी दुश्मन को आसानी से धूल चटाई जा सकती है। -लक्ष्मी सिंह, कक्षा ग्यारह।
ताइक्वांडो टीम के सदस्यों ने अच्छे ढंग से आत्मरक्षा करना और दुश्मन के वार बेकार करने की तरकीबें सिखाईं। ऐसे कार्यक्रम होने से लाभ होता है। -अदिति ओझा, कक्षा नौ।