इस तरह के मरीजों की संख्या पिछले दो तीन सालों में बढ़ी है। हर दिन 20 से 25 मरीज इस बीमारी से पीड़ित मिल रहे हैं। इनमें कई ऐसे हैं, जो तंत्र-मंत्र के चक्कर में पड़कर ज्यादा वक्त गवां दिए हैं। इसकी वजह से उनके इलाज में समय लग रहा है। ऐसे मरीजों के पूरी तरह से ठीक होने की संभावना भी कम हो जाती है।
तनाव की वजह से होती है यह बीमारी
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. तपस कुमार अईच ने बताया कि तनाव की वजह से यह बीमारी होती है। सिजोफ्रेनिया वाले परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस बीमारी का खतरा ज्यादा है। इसके अलावा वायरल संक्रमण की वजह से बच्चों में भी यह बीमारी हो जाती है। कुपोषण की वजह से बच्चों का मानसिक विकास नहीं होता है। इसकी वजह से भी यह बीमारी बच्चों में होती है। जन्म के बाद माता पिता की मौत से भी बच्चा इस बीमारी से ग्रसित हो जाता है।