हाल ही में संपन्न हुए ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में पार्टी खुद के प्रत्याशी तक नहीं सहेज सकी और औंधे मुंह गिर गई। पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि ऐसा नहीं है कि गोरखपुर में चल रही इस गुटबाजी से शीर्ष नेतृत्व अनजान है। पार्टी के ही लोग एक-दूसरे की कारस्तानी वहां तक पहुंचा रहे हैं, मगर नेतृत्व अभी खामोश है। अब पार्टी के भीतर ही यह चर्चा होने लगी है कि गुटबाजी की वजह से ही जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष के पद पर किसी की तैनाती नहीं हो पा रही है। शीर्ष नेतृत्व को आशंका है कि एक जाति-वर्ग के नेता को कमान सौंपी तो दूसरा भड़क सकता है। पुराने अनुभव, इस आशंका को बल भी देते हैं।
अगले महीने चार सीटों पर तय हो सकते हैं प्रत्याशियों के नाम
समाजवादी पार्टी दो चरणों में जिले की नौ विधानसभाओं में अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर सकती है। पहले चरण के तहत तीन से चार विधानसभा में नवंबर के अंतिम सप्ताह या दिसंबर के पहले सप्ताह तक नामों की घोषणा हो सकती है। इनमें गोरखपुर ग्रामीण, सहजनवां, कैंपियरगंज, खजनी शामिल हैं। कुछ विधानसभाओं में प्रत्याशियों के नाम दोहराए जा सकते हैं तो एक या दो विधानसभा में दूसरे दलों से आकर शामिल हुए लोगों पर भी पार्टी दांव खेल सकती है।
समाजवादी पार्टी के निवर्तमान जिलाध्यक्ष नगीना प्रसाद साहनी ने कहा कि पार्टी नेताओं-कार्यकर्ताओं के बीच कोई मनमुटाव नहीं है। सभी अनुशासित हैं और चुनाव की तैयारियों में इस संकल्प के साथ जुटे हैं कि 2022 में अखिलेश यादव के नेतृत्व में फिर सपा की सरकार बने। जिलाध्यक्ष पद पर तैनाती, राष्ट्रीय अध्यक्ष का फैसला है। वह जो भी निर्णय करेंगे, उसका पूरा सम्मान किया जाएगा।
निवर्तमान महानगर अध्यक्ष जियाउल इस्लाम ने कहा कि महानगर अध्यक्ष पद पर कब तैनाती होगी इसकी मुझे जानकारी नहीं है। यह राष्ट्रीय अध्यक्ष का फैसला होगा। पार्टी के सभी नेता, कार्यकर्ता पूरे मनोयोग से विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। जनता, भाजपा का असल चेहरा देख चुकी है और परिवर्तन का मन बना चुकी है। 2022 में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार ही आएगी।