कहावत है कि जब भगवान का आशीर्वाद साथ हो तो बिगड़े हुए काम भी बन जाते हैं। कुछ ऐसा ही पूजा के साथ हुआ। जिला अस्पताल से उसे यह कहकर चिकित्सकों ने गोरखपुर रेफर कर दिया कि खून की कमी है और प्रसव कराना खतरे से खाली नहीं है। जच्चा और बच्चा दोनों के लिए खतरा है। मगर एंबुलेंस कर्मी पूजा के लिए ईश्वर सामान हो गए। उन्होंने गोरखपुर जाते समय ही पीड़ा होने पर सुरक्षित प्रसव कराया और फिर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में दोनों को भर्ती कराया, जहां मां और बेटी दोनों खतरे से बाहर हैं।
जिला अस्पताल में लेबर रूम में भर्ती जोगिया ब्लॉक के महदेवा तिवारी गांव निवासी पूजा (20) पत्नी विकास गर्भवती थी। उसे प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां ब्लड कम होने के कारण चिकित्सकों ने प्रसव कराने से हाथ खड़ा कर दिया।
उनका कहना था कि ब्लड 8.8 है। ऐसी स्थिति में प्रसव कराना खतरे से खाली नहीं है। उन्होंने गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। एंबुलेंस से उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज ले जाया जा रहा था कि पीपीगंज के पास पीड़ा शुरू हो गई।
इसके बाद एंबुलेंस के पायलट कृष्ण प्रताप सिंह ने साथ जा रहे तीमारदार राय मशविरा किया। इसके बाद एंबुलेंस में ही सुरक्षित प्रसव कराया और बेटी पैदा हुई। फिर दोनों को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दिया। जहां उनका उपचार हो रहा है।