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डीडीयू : पूर्वजों की स्मृति में पदक प्रायोजित करने के लिए जमा करने होंगे पांच लाख रुपये

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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने स्मृति पदक को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब विश्वविद्यालय के किसी विभाग के टॉपर छात्र-छात्राओं को अपने पूर्वजों की स्मृति में स्वर्ण पदक (स्मृति पदक) दिलाने के लिए नए प्रायोजक को एकमुश्त पांच लाख रुपये जमा करने होंगे। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
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स्मृति पदक के लिए समाज का कोई भी व्यक्ति अपने पूर्वजों की स्मृति में एकमुश्त धनराशि जमा कर सकता है। प्रायोजक की ओर से जमा की गई राशि (एफडी) के ब्याज से विश्वविद्यालय हर वर्ष दीक्षांत समारोह के मंच से संबंधित विभाग के टॉपर को स्मृति पदक प्रदान करता है। स्मृति पदक 25 ग्राम चांदी का होता है, जिस पर सोने की परत चढ़ी होती है। सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए एकमुश्त राशि अब 2.50 लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने का निर्णय लिया गया है।
स्मृति पदक के लिए गठित की गई थी समिति
डीडीयू में स्मृति पदक दिए जाने की शुरुआत 1960-70 के दशक में हुई थी। आज से 50-60 साल पहले सोने-चांदी की कीमतें बहुत कम थीं। उस दौर के हिसाब से शुरुआत में प्रायोजकों से करीब पांच हजार रुपये स्मृति पदक के लिए जमा कराए गए थे। समय-समय पर उसकी समीक्षा होती रही और परिवर्तन किया जाता रहा। जैसे- पांच से 10 हजार, फिर 25 हजार, उसके बाद 50 हजार, फिर एक लाख और उसके बाद 2.50 लाख रुपये की राशि तय की गई थी। इसकी समीक्षा के लिए डीएसडब्ल्यू प्रो. अनुभूति दुबे की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी। समिति की संस्तुतियों को कार्य परिषद की बैठक में रखा गया था।
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पुराने स्मृति पदक रहेंगे बरकरार
डीडीयू में वर्तमान में विभिन्न प्रायोजकों की ओर से करीब 90 स्मृति पदक प्रदान किए जाते हैं। शुरुआती दौर में लोगों ने पांच या 10 हजार रुपये तक की एफडी कराई थी। उस रकम के ब्याज से करीब 10 से 20 गुना अधिक राशि स्मृति पदक पर देनी पड़ रही है। समिति ने इसकी भी समीक्षा की। यह निष्कर्ष निकाला गया कि वह पदक लोगों की भावना और तत्कालीन व्यवस्था से जुड़ा हुआ है, इसलिए उसे जारी रखा जाएगा। डीडीयू में स्मृति पदक के मद में करीब 70 लाख रुपये की एफडी है। उससे मिलने वाले समग्र ब्याज से स्मृति पदक प्रदान किए जाएंगे।

बोलीं कुलपति
अपनों की स्मृति में टॉपर्स को स्वर्ण पदक दिए जाने के लिए सिर्फ एक बार एफडी करानी होती है। उसके बाद विश्वविद्यालय हर साल टॉपर्स को स्वर्ण पदक प्रदान करता है। सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए नए प्रायोजकों से पांच लाख रुपये जमा कराए जाने का प्रावधान किया गया है। दशकों पहले जिन लोगों ने स्मृति पदक की शुरुआत की थी, उनकी भावनाएं उससे जुड़ी थीं। इसलिए उन्हें यथावत रखने का निर्णय लिया गया है।
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- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू
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