जानकारी के मुताबिक, राजघाट थाना क्षेत्र के हिंदी बाजार, दीवान दयाराम निवासी मीरा की बुधवार को तबीयत खराब हो गई। हालत नाजुक होने पर परिजन शाम 6:35 बजे जिला अस्पताल की इमरजेंसी में ले गए। डॉ. आशीष वर्मा ने प्राथमिक उपचार के बाद मरीज को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
आरोप है एंबुलेंस को लौटाने के साथ ही परिजन ने अपनी सहमति से मरीज को जिला अस्पताल में ही भर्ती करा दिया। कोतवाली थाने को दी तहरीर में डॉ. आशीष वर्मा ने लिखा है कि रात में मीरा की स्थिति गंभीर होने पर नर्स ने जानकारी दी तो उन्होंने परिजन से फिर एक बार मेडिकल कॉलेज ले जाने को कहा, लेकिन मना कर दिया।
रात में 11.50 बजे मरीज की मौत हो गई। जिसके बाद परिजनों ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया। प्रथम तल पर स्थित वार्ड, ड्यूटी रूम में तोड़फोड़ करने लगे। समझाने की कोशिश करने पर जानलेवा हमला कर दिया। पुलिस ने मौके से चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
अस्पताल की इमरजेंसी में हंगामे होने की वजह से अफरातफरी मच गई थी। अन्य तीमारदार भी परेशान हो गए। कई ने तो मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए मेडिकल कॉलेज या फिर दूसरे अस्पताल लेकर चले गए।
मरीज को रेफर करने पर हुआ विवाद
डॉक्टर ने मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था, लेकिन परिजन वहां नहीं जाना चाहते थे। जिला अस्पताल में मरीज की हालत बिगड़ने पर दोबारा रात में रेफर करने की बात कही और 108 नंबर एंबुलेंस भी बुला ली गई थी, लेकिन परिजनों ने एंबुलेंस को लौटा दी थी।
डॉक्टर की तहरीर पर पांच लोगों पर केस दर्ज कर लिया गया है। चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। एक आरोपी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस लगी है। - कृष्ण कुमार विश्नोई, एसपी सिटी