वारदात के बाद पहुंचे अफसरों के सामने पूछताछ में यह बात सामने आई थी। मगर अफसरों के जाने के बाद पुलिस ने मैनेजर को तहरीर देने के लिए बुलाया और फिर बदमाशों की संख्या को चार करा दिया ताकि डकैती की धारा को लूट में बदला जा सके। फिर पुलिस ने तहरीर के हवाला देकर धारा 394 (लूट के लिए बल प्रयोग) का केस दर्ज कर लिया है।
पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की जांच की तो बदमाशों की तस्वीर मिल गई। तस्वीर साफ नहीं थीं लेकिन उसे पुलिस ने एक्सपर्ट की मदद से साफ करा लिया है। इसके बाद से ही बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की छह टीमें लगाई गई हैं। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए गैर जनपद में भी दबिश दी जा रही है। एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने बताया कि तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है। सीसी टीवी कैमरे की मदद से बदमाशों की तस्वीर मिली है। पुलिस आरोपितों की तलाश में लगी है, जल्द ही घटना का पर्दाफाश कर लिया जाएगा। कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है।
लूट और डकैती में यह होता है अंतर
पुलिस ने इस मामले में धारा 394 के तहत केस दर्ज किया है। इसका मतलब होता है लूट और इस दौरान जानबूझकर किसी को चोट पहुंचाना। आईपीसी की इस धारा के तहत दोष साबित होने पर दस वर्ष की कैद, जुर्माना या फिर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। लूट में बदमाशों की संख्या चार या फिर उससे कम होती है। डकैती की धारा 395 होती है। इसमें बदमाशों की संख्या पांच या उससे ज्यादा होती है। इसमें अदालत में दोष साबित होने की स्थिति में दस साल की कैद, जुर्माना या फिर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। अगर पुलिस ने डकैती की धारा में केस दर्ज किया होता तो आला अफसरों के स्तर से तमाम तरह के सवाल हो सकते थे।