आनुवंशिक बीमारियों का पता रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) पहले ही लगाएगा। इस दिशा में आरएमआरसी में शोध होगा। शोध के अनुसार अब व्यक्ति में आनुवंशिक बीमारियों की पहचान करना पहले के मुकाबले आसान होगा। इस प्रयास से उसकी रोकथाम की दवाएं विकसित की जाएंगी। ताकि आनुवंशिक बीमारियों को रोका जा सके।
जानकारी के मुताबिक, आनुवंशिक बीमारियों को पूरी तरह से रोकना संभव नहीं होता है। ऐसे में इसकी पहचान और बचाव पर लगातार काम किया जा रहा है। आरएमआरसी के सीनियर वैज्ञानिक डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि कई ऐसी बीमारियां हैं, जो आनुवंशिक होती है। इसी आनुवंशिकता की वजह से परिवार में किसी को होने वाली बीमारी अगली पीढ़ी में भी होती है।
ये बीमारियां पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती हैं। इन बीमारियों के होने या न होने के बारे में बता पाना मुश्किल होता है। ऐसी स्थिति में पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाली ये बीमारियां लोगों को ज्यादा दर्द देती हैं। ऐसे में आनुवंशिक बीमारियों पर शोध का फैसला लिया गया है। इस शोध से आनुवंशिक बीमारियों से लोगों को बचाया जा सकेगा।
ये आनुवंशिक बीमारियां देती हैं ज्यादा दर्द
रक्त अल्पता: इसमें व्यक्ति में खून की कमी रहती है।
पार्किंसन रोग: पार्किंसन में रोगी के शरीर के अंग में कंपन होता रहता है।
थैलेसीमिया: इस रोग में शरीर का हीमोग्लोबिन खराब हो जाता है। इसकी वजह से मरीज को बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है।
डीप वेन थ्रोम्बोसिस: यह खून का थक्का होता है, जो शरीर की नसों की गहराई में होता है। इस बीमारी से जांघ पर समस्या होती है। ।
मल्टीपल स्केलेरोसिस: दिमाग की तंत्रिकाओं और रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य करने वाले सेल्स को प्रभावित करते हैं। इसकी वजह से न्यूरो संबंधी समस्या शुरू हो जाती है।
सिस्टिक फाइब्रोसिस: सिस्टिक फाइब्रोसिस जिगर, मूत्राशय के अंग, जननांग और पसीने की नसों को प्रभावित करता है।
मधुमेह: लंबे समय तक उच्च शुगर का खतरा रहता है।
हीमोफीलिया: इसमें चोट लगने पर लगातार खून बहता रहता है। यह बेहद खतरनाक बीमारी है।
डाउन सिंड्रोम: डाउन सिंड्रोम में शारीरिक और मानसिक विकास काफी धीमा होता है।
रक्तवर्णकता: यह बीमारी बेहद खतरनाक है। इसमें बहुत ज्यादा आयरन शरीर में बढ़ जाता है।