जापानी इंसेफेलाइटिस और एक्यूट इंसेफेलाइटिस के मरीजों में स्क्रब टाइफस के बैक्टीरिया का मिलना काफी चिंताजनक है। ऐसा इसलिए कि जेई और एईएस का तो टीका तो बनाया जा चुका है, लेकिन अब तक स्क्रब टाइफस का टीका नहीं बन पाया है। स्क्रब टाइफस का टीका न होने की वजह से जेई और एईएस के टीके शरीर पर कम प्रभावी होते हैं। हालांकि आरएमआरसी के सीनियर वैज्ञानिकों की टीम ने स्क्रब टाइफस जांच के लिए एक किट बना दी है, जिससे 45 मिनट में जांच पूरी हो जाएगी।
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जेई के मरीजों में लैप्टास्पायरोसिस का भी खतरा
डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि जेई के मरीजों में स्क्रब टाइफस के साथ लैप्टोस्पायरोसिस का भी खतरा है। पिछले साल जेई के 10 मरीजों में लैप्टास्पायरोसिस मिला था। यह यह एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम समूह का एक वायरस है। इससे ग्रसित बच्चों में झटका, तेज बुखार के साथ असहनीय पीड़ा होती है। यह चूहा और छछूंदर के साथ कुत्ता और बिल्ली के पेशाब व मल से फैलता है।
स्क्रब टाइफस एक बैक्टीरिया जनित बीमारी है, जो चूहों के मल-मूत्र या उसके शरीर में रहने वाले कीटाणुओं से फैलता है। यह बैक्टीरिया बच्चों को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। युवाओं और बुजुर्गाें में अब तक यह बैक्टीरिया नहीं मिले हैं। आमतौर पर जापानी इंसेफेलाइटिस के मरीजों में यह बैक्टीरिया मिल रहा है, जो विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय है।
सीएमओ डाॅ. आशुतोष कुमार दुबे ने कहा कि बारिश के मौसम में जेई, स्क्रब टाइफस, लैप्टोस्पायरोसिस के बैक्टीरिया और वायरस सक्रिय होते हैं। इस मौसम में घर में चूहा, छुछूंदर आदि को आने से रोकना होगा। इसके अलावा पालतू कुत्ते और बिल्ली की साफ-सफाई का ध्यान रखना होगा। इन जानवरों से स्क्रब टाइफस और लैप्टस्पायरोसिस का खतरा सबसे अधिक है। जेई के मरीजों की छह जांच अनिवार्य कर दी गई हैं।