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Gorakhpur News: डिसेंट अस्पताल के संचालक शुमशुल का गुर्गा ऋषि गिरफ्तार, व्हाट्सएप चैटिंग से खुली पूरी साजिश

Sat, 22 Nov 2025 01:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर

सार

जांच में पाया गया कि कई मामलों में मरीज अस्पताल में मौजूद ही नहीं थे, लेकिन फाइलों में उनकी भर्ती, जांच और इलाज दर्शाया गया था। पुलिस ने अस्पताल से दस्तावेज जब्त कर जांच शुरू की, जिसके बाद यह व्यापक फर्जीवाड़ा सामने आया। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी न सिर्फ हेल्थ इंश्योरेंस, बल्कि आयुष्मान भारत कार्ड के नाम पर भी बड़े पैमाने पर धांधली कर रहे थे।
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गिरफ्तार आरोपी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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डिसेंट हॉस्पिटल में 1.20 करोड़ रुपये की इंश्योरेंस ठगी मामले में पुलिस की जांच अब और गहराती जा रही है। शुक्रवार को रामगढ़ताल पुलिस ने अस्पताल संचालक शुमशुल कमर के गुर्गे शाहपुर के जेल रोड बाईपास पादरी बाजार निवासी ऋषभ सिंह को क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया।
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कोर्ट में पेश कर उसे जेल भिजवा दिया गया। आरोपी लंबे समय से फर्जी दस्तावेजों और झूठी बिलिंग के माध्यम से बीमा कंपनियों को चूना लगाने वाले नेटवर्क का हिस्सा बताया जा रहा है।

बीते नौ सितंबर को बजाज आलियांज जनरल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारियों ने रामगढ़ताल थाना पुलिस को तहरीर दी थी। आरोप है कि डिसेंट और एपेक्स हाॅस्पिटल के नाम पर फर्जी मरीज भर्ती दिखाकर क्लेम के एक करोड़ 80 लाख 672 रुपये की ठगी की गई।

मामला तब प्रकाश में आया जब एक मरीज के परिजनों ने शिकायत की कि मरीज को अस्पताल में भर्ती किए बिना ही इलाज दिखाकर बीमा कंपनी से क्लेम की रकम निकाल ली गई।

जांच में पाया गया कि कई मामलों में मरीज अस्पताल में मौजूद ही नहीं थे, लेकिन फाइलों में उनकी भर्ती, जांच और इलाज दर्शाया गया था। पुलिस ने अस्पताल से दस्तावेज जब्त कर जांच शुरू की, जिसके बाद यह व्यापक फर्जीवाड़ा सामने आया। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी न सिर्फ हेल्थ इंश्योरेंस, बल्कि आयुष्मान भारत कार्ड के नाम पर भी बड़े पैमाने पर धांधली कर रहे थे।

पुलिस के अनुसार, आरोपी ऋषभ सिंह डिसेंट अस्पताल के संचालक शुमशुल कमर के साथ मिलकर मरीजों को बिना भर्ती किए ही उनका फर्जी उपचार दिखाता था और बीमा कंपनी से क्लेम के रूप में लाखों रुपये वसूल लेता था।

कई अस्पतालों से आरोपी का नेटवर्क
एसओ थाना रामगढ़ताल नितिन रघुनाथ ने बताया कि जांच में यह सामने आया है कि आरोपी ऋषभ इससे पहले शहर के कई अन्य निजी अस्पतालों में भी फर्जी दस्तावेज तैयार करने और गैर-कानूनी तरीके से बिलिंग बढ़ाने का काम कर चुका है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपियों की भूमिका केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे शहर में उनका नेटवर्क फैला हुआ था।

व्हाट्सएप चैटिंग से खुली पूरी साजिश
पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद आरोपी के मोबाइल की जांच में कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। संचालक शुमशुल और ऋषभ के बीच इलाज, बिलिंग और भर्ती दिखाने को लेकर नियमित व्हाट्सएप चैटिंग होती थी। इसी चैटिंग के आधार पर पुलिस ने धांधली के कई सबूत जुटाए हैं। सूत्र बताते हैं कि चैट में फर्जी मरीजों के नाम, झूठी मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने और बीमा रकम क्लेम करने की पूरी साजिश दर्ज है।

आगे और गिरफ्तारियों की आशंका
थाना प्रभारी रामगढ़ताल का कहना है कि आरोपियों का नेटवर्क बड़ा है। शहर के कई अस्पताल इसमें संदिग्ध पाए गए हैं। पुलिस आने वाले दिनों में अन्य अस्पताल संचालकों और कर्मचारियों से भी पूछताछ करेगी।

जांच अधिकारी के अनुसार, यह संगठित फर्जीवाड़ा है और इसमें कई लोग जुड़े हो सकते हैं। सभी की भूमिका की जांच की जा रही है। डिसेंट अस्पताल प्रकरण में हुई ताजा गिरफ्तारी के बाद हेल्थ इंश्योरेंस और आयुष्मान कार्ड घोटाले की शहर में जांच तेज कर दी गई है।
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मामले में डिसेंट अस्पताल के संचालक शुमशुल को पहले ही जेल भिजवाया जा चुका है। अब उसका मुख्य गुर्गा भी पकड़ में आ गया है। दोनों से मिले सबूतों की जांच की जा रही है। जल्द ही पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा: अभिनव त्यागी, एसपी सिटी
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