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Gorakhpur News: गोरखपुर में बढ़ता नशे का धंधा, शराब के बाद ओशियन ग्रीन और तंबाकू ने बढ़ाई चिंता

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- तंबाकू सेवन से मुंह के कैंसर के मरीज बढ़े, युवाओं में नशीले पदार्थों की पहुंच बनी चुनौती
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गोरखपुर। जिले में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था दोनों के लिए चिंता का कारण बन रही है। पुलिस कार्रवाई, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुभव और सामने आ रहे मामलों से संकेत मिल रहे हैं कि शराब के साथ अब नए तरह के नशीले पदार्थों की मांग भी बढ़ रही है। हाल में गोरखपुर में भारी मात्रा में ओशियन ग्रीन की बरामदगी ने नशीले पदार्थों के बढ़ते नेटवर्क और युवाओं में इसकी पहुंच को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिले में सबसे अधिक सेवन शराब का माना जाता है। इसके बाद तंबाकू, गुटखा, खैनी, बीड़ी-सिगरेट, गांजा और स्मैक जैसे नशीले पदार्थों का इस्तेमाल करने वाले लोग सामने आ रहे हैं। पुलिस की ओर से समय-समय पर अवैध नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई भी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों और चिकित्सकों के अनुसार, तंबाकू सेवन का असर गंभीर रूप से दिखाई दे रहा है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि जिले में बड़ी संख्या में लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। एनएफएचएस-5 के आंकड़ों के अनुसार गोरखपुर में 44.6 प्रतिशत पुरुष और 5.4 प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करती हैं। पूर्वांचल में मुंह के कैंसर के मरीजों की संख्या भी अधिक बताई गई है। एम्स और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग में पूर्वी उत्तर प्रदेश के बड़ी संख्या में कैंसर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। यहां पंजीकृत मरीजों में करीब 60 प्रतिशत अन्य जिलों से रेफर होकर आते हैं। हालिया रिपोर्ट में पूर्वी यूपी में पांच साल के दौरान कैंसर मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी की बात सामने आई है। पुरुषों में मुंह के कैंसर के मामले प्रमुख रूप से देखे जा रहे हैं।


डॉक्टर का वर्जन
तंबाकू और धूम्रपान मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर के बड़े कारण हैं। युवाओं में नशे की शुरुआत रोकना बेहद जरूरी है क्योंकि शुरुआती आदत आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है।
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- डॉ. शशांक शेखर, एसोसिएट प्रोफेसर, ऑन्कोलॉजी विभाग, एम्स


शराब और अन्य नशीले पदार्थ शरीर के साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करते हैं। नशे की गिरफ्त में आए लोगों को समय पर काउंसिलिंग और उपचार उपलब्ध कराया जाए तो उन्हें इस आदत से बाहर निकाला जा सकता है।
- डॉ. तापस कुमार आइच, प्रोफेसर, मनोचिकित्सा विभाग, बीआरडी मेडिकल कॉलेज


नशे के प्रमुख खतरे

शराब : लिवर रोग, मानसिक तनाव और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा
तंबाकू : मुंह और गले के कैंसर का बड़ा कारण
ओशियन ग्रीन व अन्य सिंथेटिक नशीले पदार्थ : युवाओं में बढ़ती निर्भरता और स्वास्थ्य जोखिम
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