गोरखपुर। शोध के आंकड़ों से सही निष्कर्ष निकालने के लिए नमूना चयन से लेकर सांख्यिकीय विश्लेषण तक की बारीकियां समझना जरूरी है। गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोध पद्धति पाठ्यक्रम (आरएमसी) के सातवें दिन मंगलवार को विशेषज्ञों ने शोधार्थियों को वैज्ञानिक विश्लेषण के तरीके बताए। साथ ही सतत विकास में भारतीय ज्ञान परंपरा की उपयोगिता पर चर्चा की।
आईसीएसएसआर के प्रायोजन में आयोजित पाठ्यक्रम के पहले दो सत्रों में बीएचयू के प्रो. ज्ञान प्रकाश सिंह ने सैंपलिंग, सैंपल साइज, शोध अभिकल्प, परिकल्पना परीक्षण और सांख्यिकीय विधियों की जानकारी दी। उन्होंने विभिन्न अध्ययन पद्धतियों और आंकड़ों के विश्लेषण को उदाहरणों से समझाया। तीसरे सत्र में डीडीयू के प्रो. विनय कुमार सिंह ने स्वदेशी ज्ञान, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में भारतीय ज्ञान प्रणाली की भूमिका बताई। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध के समन्वय को उपयोगी बताया। पाठ्यक्रम के निदेशक प्रो. मुकेश कुमार सिंह और सह-निदेशक डॉ. मीतू सिंह हैं।