आने वाले समय में नगर निगम की दुकानों का किराया बढ़ सकता है। फिलहाल 2047 दुकानों का किराया पांच रुपये से 25 हजार रुपये तक है, लेकिन वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड की सिफारिश के अनुसार दुकानों का किराया बाजार दर के अनुसार तय हो सकता है। ऐसे में किराया 2,000 से 50 हजार रुपये तक किया जा सकता है।
करीब दो दशक पहले आवंटित दुकानों का किराया अभी तक नहीं बढ़ाया गया है। जबकि नगर निगम के साथ हुए करार के अनुसार किराया पांच वर्षों में बढ़ता है। लेकिन, इसमें भी कई तरह की भिन्नताएं हैं। ऐसे में कई दुकानों के किराए में नाम मात्र की बढ़ोतरी हुई है।
गोलघर में बाजार मूल्य पर जिन दुकानों का किराया 10 से 15 हजार रुपये है। उतने स्पेस का प्राइवेट व्यक्तियों द्वारा 75,000 से अधिक किराया लिया जा रहा है। इंदिरा बाल विहार के सामने तो नगर निगम की दुकानों का स्वरूप ही बदल दिया गया है, जबकि किराया कौड़ियों में है। इसी तरह कचहरी बस स्टेशन के बगल की दुकानों का भी किराया काफी कम है।
इन संपत्तियों की देखरेख और किराया वसूली के लिए रेंट विभाग भी है। अधिकतर शहरों में प्राइम लोकेशन पर दुकानें और आवास हैं। निगम के जिम्मेदार तो इन संपत्तियों की वास्तविक जानकारी भी देने से बचते हैं। इसके पीछे लंबा खेल बताया जाता है।
आवंटियों ने किराए पर दी हैं दुकानें
रीड साहब धर्मशाला, स्टेशन रोड, असुरन और मोहद्दीपुर में तो आवंटियों ने दुकानों को किराए पर लगा रखा है। नगर निगम को जहां 500 से 1000 रुपये किराया मिलता है, वहीं आवंटी 30 से 40 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं।
नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने कहा कि दुकानदारों के साथ नगर निगम का जो करार है, उसके आधार पर किराया वसूला जाता है। शासन की तरफ से जो भी दिशा निर्देश होगा, उसका पालन किया जाएगा।