टीबी रोगियों की खोज व उपचार के लिए जिले के दर्जनभर से अधिक धर्मगुरु और मदरसा शिक्षकों का भी सहयोग लिया जाएगा। ये लोग जनसमुदाय को टीबी रोग के प्रति जागरूक करेंगे।
डीटीओ ने उपस्थित धर्मगुरुओं और मदरसा शिक्षकों से अपील करते हुए कहा कि अपने क्षेत्र के टीबी ग्रसित बच्चों को गोद लें। गोद लेने का आशय बच्चे का समय- समय पर हालचाल लेना और यह सुनिश्चित करना है कि उनकी दवा बंद न हो। बच्चे को पोषक तत्व युक्त खानपान की चीजें भी मुहैया कराएं।
डीटीओ ने बताया कि टीबी के मरीज को उपचार के दौरान 500 रुपये प्रतिमाह पोषण के लिए दिए जाते हैं। टीबी के नये रोगी को खोजने वाले गैर सरकारी व्यक्ति को भी 500 रुपये दिये जाते हैं। टीबी की जांच और इलाज की नि:शुल्क सुविधा सभी सरकारी अस्पतालों पर उपलब्ध है।
कार्यक्रम के दौरान धर्मगुरुओं और मदरसा शिक्षकों ने अधिकारियों को आश्वस्त किया कि वे टीबी रोगियों को ढूंढने में मदद करेंगे। प्रचार-प्रसार में भी सहयोग का आश्वासन दिया। इस मौके पर डीआर लाल, डॉ. एसके लारेंस, मिर्जा रफीउल्लाह, मो. अजमल, नजरे आलम, अख्तर हुसैन, सरदार बलबीर सिंह आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम में जिला समन्वयक धर्मवीर प्रताप सिंह, पीपीएम कोआर्डिनेटर एएन मिश्र और वर्ल्ड विजन इंडिया संस्था के प्रतिनिधि शक्ति पांडेय भी मौजूद रहे।