गोरखपुर। ‘जीरो वेस्ट’ और ‘आत्मनिर्भर सिटी’ के रूप में गोरखपुर को स्थापित करने की दिशा में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण पहल हुई। नगर निगम व एनवायरनमेंट मैनेजमेंट सेंटर (ईएमसी) की ओर से स्थानीय होटल में आयोजित राउंड टेबल कांफ्रेंस में “एमएसडब्ल्यू से आरडीएफ उपयोग के लिए पारिस्थितिकी तंत्र सुदृढ़ीकरण रोडमैप” का विमोचन किया गया। नई रोडमैप से कचरे से बने ईंधन की आपूर्ति शृंखला मजबूत होगी।
कार्यक्रम के दौरान मेयर डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि अपशिष्ट प्रबंधन अब केवल कूड़ा निस्तारण नहीं, बल्कि ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। आरडीएफ तकनीक से कचरे को ईंधन में बदलकर सीमेंट उद्योगों में कोयले के विकल्प के रूप में उपयोग किया जाएगा, जिससे लैंडफिल का दबाव कम होगा और निगम को आय के नए स्रोत मिलेंगे। अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार ने बताया कि ‘सोर्स सेग्रीगेशन’ को प्रभावी बनाने और प्रोसेसिंग इकाइयों को आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने भाग लेते हुए आरडीएफ की गुणवत्ता, कैलोरीफिक वैल्यू और आपूर्ति पर चर्चा की। लंग केयर फाउंडेशन के राजीव खुराना ने बताया कि सीमेंट भट्टियों में नियंत्रित तरीके से कचरे का निस्तारण पर्यावरण के लिए सुरक्षित है और वायु गुणवत्ता में सुधार करता है। सम्मेलन में पर्यावरणविदों और शिक्षाविदों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सुझाव दिए। इस पहल को ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ की दिशा में गोरखपुर का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो स्वच्छ भारत मिशन और एनसीएपी लक्ष्यों को मजबूती देगा।