मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि गोरखपुर जं. स्टेशन के पुनर्विकास मॉडल में स्थानीय सांस्कृतिक विरासत एवं वास्तुकला को भी शामिल किया गया है। वर्तमान में मुख्य स्टेशन भवन का निर्माण 5,855 वर्ग मीटर एवं द्वितीय प्रवेश द्वार का निर्माण 720 वर्ग मीटर में होगा। प्रस्तावित स्टेशन का निर्माण 17,900 वर्ग मीटर एवं द्वितीय प्रवेश द्वार का निर्माण 7,400 वर्ग मीटर में किया जाएगा।
10,800 वर्ग मीटर में रूफ प्लाजा होगा, जहां फूड आउटलेट, वेटिंग हॉल, एटीएम एवं किड्स प्ले एरिया का प्रावधान किया जाएगा। रूफ प्लाजा से प्लेटफॉर्मों तथा प्रवेश एवं निकास द्वार पर 38 लिफ्ट, 22 एस्केलेटर लगाए जाएंगे। 300 वर्ग मीटर में टिकट खिड़कियां बनाई जाएंगी।
स्टेशन परिसर में कंजेशन फ्री प्रवेश एवं निकास का प्रावधान किया जाएगा। दो मल्टी परपज वाणिज्यिक टॉवर बनाए जाएंगे। इसमें मल्टी लेवल कार पार्किंग, बजट होटल, कामर्शियल शॉप इत्यादि का प्रावधान होगा। प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन एवं बस स्टेशन से स्काई वॉक-वे से लिंक किया जाएगा। कार, टू व्हीलर्स, थ्री व्हीलर्स की पार्किंग क्षमता 427 से बढ़ाकर 838 की जाएगी। दोनों प्रवेश द्वार के सर्कुलेटिंग क्षेत्र में हरित पट्टी (ग्रीन बेल्ट) विकसित की जाएगी। प्रस्तावित मॉडल के अनुरूप कार्य के लिए डीपीआर तैयार कर ली गई है।
138 साल पहले बना था गोरखपुर स्टेशन
15 जनवरी, 1885 को सोनपुर से मनकापुर तक मीटर गेज रेल लाइन के निर्माण के साथ ही गोरखपुर रेलवे स्टेशन अस्तित्व में आया। वर्ष 1886 में गोरखपुर से उस्का बाजार लाइन के निर्माण के साथ ही गोरखपुर जंक्शन स्टेशन बन गया। वर्ष 1981 में छपरा से मल्हौर तक का आमान परिवर्तन हुआ और गोरखपुर जंक्शन बड़ी लाइन से देश के अन्य महानगरों से जुड़ गया।