सिंचाई विभाग के आंकड़े भी मानसून के बदलते ढर्रे की गवाही देते हैं। जुलाई, अगस्त और सितंबर के अलावा अक्टूबर माह में भी बाढ़ आ रही है। वर्ष 2022 में 24 अक्टूबर तक राप्ती नदी खतरे के निशान से ऊपर बही थी। जबकि इसके पूर्व वर्ष 2021 में 16 सितंबर तक राप्ती का जलस्तर 74.940 मीटर गेज था। इस साल भी मानसून में विलंब हुआ है। मौसम विभाग के जानकारों के अनुसार इस बार भी 10 अक्टूबर के बाद तक बारिश होने का अनुमान है।
मौसम विभाग के जानकारों के अनुसार, 15 जून से लेकर 30 सितंबर तक मानसून का सीजन होता है। इस दौरान होने वाली अधिकाधिक बारिश से जलभराव की स्थिति बनती है। वर्ष 2022 में विलंब से आकर मानसून देरी से लौटा था। इस बार भी इसी तरह के अनुमान हैं।
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ऐसे में अक्टूबर माह तक बाढ़ की स्थिति बनी रहेगी। जलवायु में हो रहे बदलाव के कारण बारिश भी आगे खिसकती जा रही है। इसका असर बाढ़ पर पड़ रहा है। जानकारों का कहना है कि बीते साल अक्टूबर माह में हुई बारिश पिछले 50 साल की तुलना में सर्वाधिक थी।
मंगलवार को जारी सूचना के मुताबिक, नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है, लेकिन इसकी रफ्तार काफी कम है। राप्ती नदी जहां चढ़ाव पर रही, वहीं रोहिन नदी का पानी भौराबारी में घटाव पर रहा। तुर्तीपार में घाघरा, बर्डघाट में राप्ती सहित अन्य नदियों का जलस्तर चढ़ाव पर दर्ज किया गया। सिंचाई विभाग के लोगों का कहना है कि अभी नदी का बढ़ाव जारी रहेगा।
मंगलवार की सुबह आठ बजे और शाम चार बजे नदी का जलस्तर
| नदी |
स्थान |
खतरे का निशान |
सुबह आठ बजे |
शाम चार बजे |
| घाघरा |
अयोध्या पुल |
92.73 |
91.270 |
91.270 |
| घाघरा |
तुर्तीपार |
64.01 |
61.810 |
61.890 |
| कुआनो |
मुखलिसपुर |
78.65 |
75.710 |
75.730 |
| राप्ती |
बांसी |
84.90 |
82.420 |
00 |
| राप्ती |
बर्डघाट |
74.98 |
79.890 |
00 |
रोहिन
रोहिल |
त्रिमुहानी
भौराबारी |
82.44
79.00 |
79.890
75.400 |
00
75.350 |
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण विशेषज्ञ गौतम गुप्ता ने कहा कि जलवायु में बदलाव के कारण मानसून का ढर्रा भी बदला है। इसके विलंब से आने और देरी से लौटने की वजह से यह नौबत आई है। यदि समय से बारिश हो तो नदी में बाढ़ भी समय से आकर खत्म हो जाएगी। लेकिन दो, तीन साल से यह गड़बड़ी देखी जा रही है।
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मौसम वैज्ञानिक कैलाश पांडेय ने कहा कि नेपाल में नदी के कैचमेंट एरिया (जल प्रभावित क्षेत्र) में बारिश होने से राप्ती और रोहिन का पानी बढ़ता है। पिछले हफ्ते में वहां बारिश हुई थी। इससे नदियों का जलस्तर बढ़ा। मानसून भी खिसककर अक्टूबर माह तक पहुंच जा रहा है। इससे बारिश विलंब से हो रही है।
सिंचाई विभाग अधीक्षण अभियंता दिनेश सिंह ने कहा कि नेपाल में बारिश होने पर राप्ती और रोहिन का पानी बढ़ेगा। हाल के दिनों में कम बारिश हुई है। इसलिए अभी नदी धीमी गति से बढ़ रही है। बाढ़ को देखते हुए तैयारी पूरी कर ली गई है।