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गोरखपुर: पूर्वांचल की सबसे पुरानी है बर्डघाट की रामलीला, 1862 से हो रहा है मंचन

Thu, 15 Sep 2022 04:15 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

श्री रामलीला समिति, बर्डघाट के महामंत्री अनूप अग्रहरि ने बताया कि पहली बार इस रामलीला का आयोजन वर्ष 1862 में स्व. राय कृष्ण किशोर प्रसाद (राय साहब सरहरी) द्वारा किया गया। इसके बाद से लगातार हर वर्ष यहां रामलीला आयोजित की जाती है।
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रामलीला का मंचन करते कलाकार। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गोरखपुर बर्डघाट की रामलीला पूर्वांचल की सबसे प्राचीनतम रामलीला है। इसके 160 वर्षों के आयोजन का रिकॉर्ड समिति के पास है। हालांकि लोगों का मानना है कि वहां उसके बहुत पहले से ही रामलीला का आयोजन होता रहा है। 160वें वर्ष को भव्य ढंग से मनाने की तैयारी चल रही है।

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श्री रामलीला समिति, बर्डघाट के महामंत्री अनूप अग्रहरि ने बताया कि पहली बार इस रामलीला का आयोजन वर्ष 1862 में स्व. राय कृष्ण किशोर प्रसाद (राय साहब सरहरी) द्वारा किया गया। इसके बाद से लगातार हर वर्ष यहां रामलीला आयोजित की जाती है।
 
उन्होंने बताया कि आय-व्यय का ब्योरा व रामलीला को और भी बड़े स्तर पर पहुंचाने के लिए वर्ष 1980 में रामलीला कमेटी का गठन किया गया। इसके बाद मंचन कमेटी के बैनर तले आयोजित होने लगा। हर वर्ष देश के विभिन्न कोने से कलाकार रामलीला के मंचन के लिए आते हैं।
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22 सितंबर से शुरू होगी रामलीला

कमेटी के अध्यक्ष पंकज गोयल ने बताया कि इस वर्ष 22 सितंबर से रामलीला की शुरुआत हो रही है। समापन 10 अक्तूबर को होगा। बताया कि हनुमानगढ़ी, अयोध्या के मुख्य पुजारी महंत राजू राम दास 25 सितंबर को निकलने वाली राम बारात में मुख्य अतिथि होंगे।  

साउथ इंडियन लूंगी में दिखेंगे कार्यकर्ता
रामलीला समिति के सभी कार्यकर्ताओं का ड्रेस कोड इस बार निर्धारित होगा। वह साउथ इंडियन स्टाइल में सफेद लूंगी पहने दिखेंगे। सफेद शर्ट पहने कार्यकर्ताओं के गले में वृंदावन का रानी रंग का पटका होगा। एक ही ड्रेस में कार्यकर्ताओं के होने से यह सुविधा होगी कि कोई भी समस्या होने पर अपनी बात रख सकेंगे।

रामलीला मंचन का विवरण
  • 22 सितंबर : शिव सती संवाद, नारद मोह, मनुसतरूपा, रावण जन्म।
  • 23 सितंबर : पृथ्वी पुकार, रामजन्म, मुनि आगमन, ताड़का वध।
  • 24 सितंबर : अहिल्या उद्धार, नगर दर्शन, धनुष यज्ञ, परशुराम-लक्ष्मण संवाद।
  • 25 सितंबर : श्रीराम बरात  
  • 26 सितंबर : श्री राम वन यात्रा।
  • 27 सितंबर : निषाद मिलन, श्रीराम-केवट संवाद, रामजी का चित्रकूट आगमन।
  • 28 सितंबर : श्री भरत-माता कौशल्या संवाद, भरत जी का चित्रकूट प्रस्थान।
  • 29 सितंबर : श्रीराम-भरत संवाद, चरण पादुका लेकर अयोध्या वापसी।
  • 30 सितंबर : शूपर्णखा नासिका भेदन, खर दूषण वध, सीता हरण, श्रीराम का सबरी आश्रम में प्रवेश।
  • 1 अक्तूबर :  श्रीराम हनुमान मिलन, सुग्रीव मिलन, बालि वध, सीताजी की खोज में वानरों का प्रस्थान।
  • 2 अक्तूबर : हनुमान-जामवंत संवाद, लंका में प्रवेश, सीता-हनुमान संवाद, लंका दहन।
  • 3 अक्तूबर : श्रीराम-हनुमान संवाद, रामेश्वर स्थापना, अंगद-रावण संवाद।
  • 4 अक्तूबर : लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, श्रीराम की प्रलय लीला, कुंभकर्ण एवं मेघनाद वध।
  • 5 अक्तूबर : हनुमान जी द्वारा उद्धार, अहिरावण वध, राम-रावण युद्ध एवं रावण वध, राजनैतिक उपदेश।
  • 9 अक्तूबर : भरत मिलाप।
  • 10 अक्तूबर : श्रीराम का राज्याभिषेक।
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