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भाई-बहनों के रिश्तों के बीच भारत-नेपाल सीमा बना दीवार, घर नहीं जा पाने से बहनें मायूस

Fri, 31 Jul 2020 03:32 PM IST
vivek shukla संवाद एजेंसी, महराजगंज
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indo-nepal border - फोटो : अमर उजाला।
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रक्षाबंधन पर्व पर इस बार कोरोना का संकट मंडरा रहा है, तो इंडो-नेपाल बॉर्डर की सील सीमा दीवार बन गई है। अब तो ज्यादातर बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के बजाए पोस्ट ऑफिस की सहारा ले रही है। जबकि वही जिले से सटे नेपाल राष्ट्र के अन्य जिलों में भारत की बहनें भाइयों के घर इन बार नहीं आ रही हैं जिससे वे मायूस हैं।

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बहनें ससुराल में हो या फिर पति के साथ परदेश। लेकिन रक्षाबंधन के दिन भाई के घर जा कर शुभ मुहूर्त में रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा को हर हाल में निभाती है। लेकिन इस बार कोरोना एवं भारत नेपाल की सील सीमा ने बहनो को मुश्किल में डाल दिया है।

इस वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते ज्यादातर बहनें चाह कर भी भाइयों के घर नहीं जा पा रही हैं। ऐसे में बहनें डाकखाने से राखी पोस्ट कर भाइयों के घर भेज रही हैं। हालांकि कोरोना संक्रमण को देखते हुए इंडो-नेपाल बॉर्डर महीनों से सील है। दोनों देशों के सुरक्षाबलों द्वारा कड़ी निगरानी कर रहे हैं। भारत से कई बहनें की शादी नेपाल राष्ट्र में हुई है। तो नेपाल राष्ट्र के कई बहनों की शादी भारत के सीमावर्ती इलाकों सहित अन्य शहरों में हुई है।

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निराश हैं लोग

नगर के घोड़हवा वार्ड निवासी नंदनी ने बताया कि वह हर वर्ष अपने मायके बलुईधूस जा कर भाइयों की कलाई पर राखी बांधती थी। लेकिन इस वर्ष वह कोरोना संकट के चलते भाइयों के घर नहीं जाउंगी। जिसके कारण अपने भाइयों के लिए डाक से राखी भेजी है।

डगरूपुर की रीता देवी ने बताया कि मेरे भाई मुंबई में रहकर नौकरी करते हैं। हर वर्ष रक्षाबंधन पर मेरे घर आकर राखी बंधवाते थे। लेकिन इस वर्ष कोरोना संकट के चलते घर नहीं आएंगे। जिसके कारण उनके लिए डाक के माध्यम से राखी भेजा गया है।

वही सीमावर्ती गांव शितलापुर निवासी दिवाकर पाठक में बताया कि उनकी बेटी सुमन पाठक की शादी नेपाल राष्ट्र के जिला नवलपरासी के करमैनी गांव में हुआ है। बहन सुमन दो दिन पहले फोन कर बात की।  बहन हर वर्ष रक्षाबंधन पर्व पर राखी और मिठाईयां लेकर घर आती थी। लेकिन इस बार बॉर्डर सील होने के चलते नहीं आ पा रही है। फोन पर भावुक होकर कहा कि कब तक बॉर्डर सील रहेगा। राखी कैसे भेजू कुछ समझ में नहीं आ रहा है।

शितलापुर खेसरहा निवासी महेन्द्र गुप्ता की पत्नी कुंती का मायका नेपाल राष्ट्र के गांव बेलाटारी फेनहरवा में है। कुंती तीन भाइयों में वह अकेली बहन हैं। कुंती ने बेहद मायूस होकर कहा कि रक्षाबंधन का पर्व काफी निकट आ चुका है। सीमा से सटे मायका होने के कारण कभी भी चली जाती थी। लेकिन बॉर्डर सील होने के कारण मायके जाना काफी मुश्किल हो गया है।

जयश्री निवासी संजू का मायका नेपाल राष्ट्र के गांव पिपरपाती में है। संजू का कहना है कि रक्षाबंधन पर्व हर साल भाईयों को रक्षाबंधन बांधने जाती थी। लेकिन इस बार तो सीमा सील होने के कारण फोन से ही आर्शिवाद लेना पडेगा। बॉर्डर सील होने के कारण अब हालात बदल चुके हैं। सरहद लांघना आसान नहीं है।
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