रेलवे ट्रैक पर अब सिग्नल की खराबी को पहले ही चिन्हित कर लिया जाएगा। इसके लिए रेलवे, डायग्नोस्टिक टेस्ट पैनल लगाने जा रहा है। वाराणसी में सफल प्रयोग के बाद गोरखपुर और लखनऊ मंडल में भी इसे लगाने की तैयारी है।
नई व्यवस्था के बाद समय की बर्बादी नहीं होगी। खराबी को पहले ही दूर करके ट्रेन रवाना कर दी जाएगी। सिग्नल खराबी से ट्रेन रुकने की समस्या खत्म हो जाएगी। दरअसल, ट्रेनों के संचालन का माध्यम अभी रूट रिले इंटरलॉकिंग है। पैनल आधारित इस प्रक्रिया में तारों का संजाल होता है। पैनल से होकर गुजरने वाले तारों के कटने और खराबी आने से सिग्नल फेल हो जाता है।
सिग्नल न मिलने पर ट्रेनें खड़ी कर दी जाती हैं। डायग्नोस्टिक टेस्ट पैनल लगने से यह समस्या समाप्त हो जाएगी। इसके माध्यम से सिग्नल की खराबी की जानकारी पहले ही हो जाएगी, जिसे आसानी से ठीक करा लिया जाएगा। इसकी मॉनीटरिंग भी आसान है। इंटरलॉकिंग पैनल से ही सिग्नल विभाग के लोग इसकी निगरानी कर सकेंगे।
ऐसे काम करेगा डायग्नोस्टिक टेस्ट पैनल
डायग्नोस्टिक टेस्ट पैनल, रेलवे ट्रैक पर बिछाए गए सिग्नल वायर को स्कैन कर लेगा। पैनल में एक ऐसा चिप लगा होगा, जिसके माध्यम से वायर जहां कटे या कमजोर होंगे, उनकी जानकारी हो जाएगी। इसके बाद मौके पर पहुंच कर रेलकर्मी खराबी को ठीक करा देंगे।
20 फीसदी कम फेल हुए सिग्नल
डायग्नोस्टिक टेस्ट पैनल के लगने से पूर्वोत्तर रेलवे में इस वर्ष 20 फीसदी सिग्नल कम फेल हुए हैं। जब यह पैनल हर जगह लगा दिया जाएगा, तब यह आंकड़ा और बढ़ जाएगा। सिग्नल कम फेल होने से ट्रेनों का संचालन बाधित नहीं होगा।
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि रेलवे के सिग्नलों में होने वाली असफलता को कम करने के लिए सिस्टम सुधार के कार्य किए गए हैं। इसी क्रम में सिग्नलों की खराबी की सटीक जानकारी के लिए डायग्नोस्टिक टेस्ट पैनल्स लगाए गए हैं। जिनके माध्यम से गत वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत का सुधार हुआ है।