गोरखपुर। गुणवत्तापूर्ण शोध, उच्च स्तरीय प्रकाशन और अंतर्विषयक सहयोग को बढ़ावा देकर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की अकादमिक पहचान को और मजबूत किया जाएगा। अकादमिक गतिविधियों और भावी कार्ययोजना की समीक्षा के दौरान समाजशास्त्र, मनोविज्ञान और भूगोल विभागों ने कुलपति प्रो. केपी सिंह के समक्ष अपना विभागीय विजन प्रस्तुत किया। कुलपति ने शोध परियोजनाएं बढ़ाने के साथ राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकादमिक सहयोग विकसित करने पर जोर दिया।
समाजशास्त्र विभाग की करीब ढाई घंटे चली प्रस्तुति में विभागाध्यक्ष डॉ. सुभी धूसिया ने शैक्षणिक गतिविधियों, शोध कार्य, उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। कुलपति ने विभाग के विजन-मिशन को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उन्होंने शोधार्थियों की शोध सलाहकार समितियों और शोध निर्देशकों के साथ नियमित बैठकें कराने तथा अधिक शोध परियोजनाएं हासिल करने को कहा। शिक्षकों को अपनी विशेषज्ञताओं को जोड़कर संयुक्त शोध-पत्र तैयार करने के लिए भी प्रेरित किया।
मनोविज्ञान विभाग ने कुलपति और कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. राजवंत राव के समक्ष विभागीय गतिविधियों, अनुसंधान, प्रकाशन और विद्यार्थियों से संबंधित कार्यों का ब्योरा रखा। कुलपति ने गुणवत्तापूर्ण शोध के साथ प्रतिष्ठित प्रकाशनों और शोध-पत्रों के अधिकाधिक साइटेशन हासिल करने की आवश्यकता बताई।
भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. स्वर्णिमा सिंह ने अकादमिक एवं शोध गतिविधियों, उपलब्धियों तथा आगामी योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया। इस दौरान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से अकादमिक साझेदारी, शोध परियोजनाओं, प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में प्रकाशन तथा विभिन्न विषयों को जोड़कर अनुसंधान को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।