वाराणसी के रामेश्वर गांव की रहने वाली हॉकी खिलाड़ी कोमल पाल के पिता अभयराज पाल परिवार का खर्च चलाने के लिए मुंबई में ट्रक चलाते हैं, लेकिन घर खर्च नहीं चल पाता था। जिसके बाद मां बेटी के हॉकी खेलने के शौक को पूरा करने के लिए सिलाई का काम करने लगींं। जिसका नतीजा है कि आज मां-बाप के उम्मीदों पर खरा उतरते हुए कोमल ने भारतीय टीम में जगह बनाई है।
कोमल के पिता शादी के पहले से ही मुंबई में रहकर ट्रक चलाते थे। शादी के बाद वह पत्नी को लेकर मुंबई चले गए। कोमल भी साथ में रहने लगी। इस बीच बच्चों की पढ़ाई के लिए अभयराज पाल ने अपने परिवार को गांव भेज दिया। जहां कोमल का रुझान हॉकी की ओर होने लगा।
इसे भी पढ़ें: गाड़ियों के धुएं से नहीं निकलेंगे कार्बन-सल्फर, चैंबर में ही बन जाएगी स्याही
कोमल के खेल को देखकर पिता ने भी सहयोग करना शुरू कर दिया। उन्होंने कोमल का दाखिला गांव के पास ही विवेक स्पोर्ट्स एकेडमी में करा दिया। जहां वह हॉकी का प्रशिक्षण प्राप्त करने लगीं। बेटी के हॉकी की जरूरतों को पूरा करने के लिए मां चिंता देवी भी घर में ही सिलाई का काम करने लगीं।
इस बीच जब स्पोर्ट्स कॉलेज गोरखपुर में आवेदन के लिए फार्म आए तो कोमल ने भरा और चयन हो गया। यहां प्रशिक्षण प्राप्त करते हुए कोमल ने डिफेंडर खिलाड़ी के रूप में दो बार खेलो इंडिया गेम में प्रतिभाग किया और फिर पिछले वर्ष मणिपुर राष्ट्रीय सब जूनियर हॉकी प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। कोमल अपना रोल मॉडल हॉकी खिलाड़ी दीपेंदर पाल को मानती हैं।