एमएमएमयूटी के भौतिकी विभाग के प्रो. बीके पांडेय और उनके शोधार्थी व संस्कृति विश्वविद्यालय, मथुरा के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभय प्रकाश श्रीवास्तव ने इस शोध में एल्युमिनियम आधारित धात्विक कांच का विस्तृत अध्ययन किया है। छह महीने तक किए शोध में धात्विक कांच के संरचनात्मक, यांत्रिक, इलेक्ट्रॉनिक व प्रकाशीय गुणों को पहली बार गहराई से समझा गया।
घर की छत हो या कार का बॉडी पार्ट या फिर रक्षा क्षेत्र के उपकरण..., अत्यधिक तापमान और जंग से इन्हें बचाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के शोधकर्ताओं ने ऐसी खास कोटिंग विकसित की है, जो धातु की सतह को ज्यादा मजबूत बनाएगी और जंग लगने से बचाएगी।
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इससे चीजों की उम्र बढ़ेगी और रखरखाव का खर्च भी कम हो सकता है। इस शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल एल्सेवियर के जून के अंक में जगह मिली है। एमएमएमयूटी के भौतिकी विभाग के प्रो. बीके पांडेय और उनके शोधार्थी व संस्कृति विश्वविद्यालय, मथुरा के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभय प्रकाश श्रीवास्तव ने इस शोध में एल्युमिनियम आधारित धात्विक कांच का विस्तृत अध्ययन किया है।
छह महीने तक किए शोध में धात्विक कांच के संरचनात्मक, यांत्रिक, इलेक्ट्रॉनिक व प्रकाशीय गुणों को पहली बार गहराई से समझा गया। निष्कर्ष में पाया गया कि एल्युमिनियम आधारित धात्विक कांच स्मार्ट कोटिंग्स से उष्मा परावर्तित होकर ऊपर चली जाती है और घर या गाड़ी के नीचे तापमान का असर भी कम हो जाता है।
धात्विक कांच की खास बात इसके परमाणुओं की अव्यवस्थित संरचना होती है। इसी वजह से यह सामान्य धातुओं की तुलना में ज्यादा स्थिर और टिकाऊ बन जाता है। इसलिए यह कठिन परिस्थितियों जैसे ज्यादा गर्मी, दबाव में भी लंबे समय तक बेहतर तरीके से काम कर सकता है।
अध्ययन में यह भी सामने आया है कि यह धात्विक कांच कम ऊर्जा वाली रोशनी को अच्छी तरह परावर्तित करता है, जबकि ज्यादा ऊर्जा वाली पराबैंगनी किरणों को काफी हद तक गुजरने देता है। इस अनोखे गुण के कारण यह सामग्री भविष्य में आधुनिक ऑप्टिकल कोटिंग्स और ऊर्जा बचाने वाली सतहों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
दावा: धात्विक कांच पर पहला अध्ययन
वैज्ञानिकों का कहना है कि एल्युमिनियम आधारित इस नए धात्विक कांच पर किया गया यह अब तक का पहला बड़ा सैद्धांतिक अध्ययन है। यह शोध भविष्य में बेहतर ऑप्टिकल और सुरक्षात्मक कोटिंग्स बनाने में मदद कर सकता है। इससे हल्की लेकिन मजबूत सामग्री विकसित करने का रास्ता भी खुलेगा।
इसका असर इलेक्ट्रॉनिक्स, फोटोनिक्स और ऊर्जा तकनीक जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाओं के रूप में देखने को मिल सकता है। फोटोनिक्स यानी रोशनी का तकनीकी इस्तेमाल करके काम करना। यह लेजर, ऑप्टिकल डिवाइस और हाई-टेक सिस्टम में उपयोगी हो सकता है।