थाने की कमान संभालने से पहले इंस्पेक्टर और दरोगा को साइबर क्राइम की परीक्षा देनी होगी। बढ़ते साइबर अपराध और उसे हल करने में सामने आ रही चुनौतियों को देखते हुए यह व्यवस्था लागू करने का फैसला किया गया। एक माह के प्रशिक्षण की शुरुआत जुलाई से होगी।
एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। प्रशिक्षण में साइबर सुरक्षा, डिजिटल साक्ष्य और तकनीकी जांच की बारीकियां सिखाई जाएंगी। एमएमएमयूटी के साइबर विशेषज्ञ प्रशिक्षण देंगे।
पुलिस आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में 6,834 साइबर शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 5,182 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई।
साइबर अपराधियों ने 27.49 करोड़ रुपये की ठगी की, जबकि पुलिस केवल 9.77 करोड़ रुपये ही फ्रीज और रिफंड करा सकी। वर्ष 2026 (अप्रैल तक) में 2,767 मामलों में 10.73 करोड़ की ठगी हुई, जिसमें 3.62 करोड़ रुपये वापस कराए गए। यह राशि ठगी गई रकम की 30 फीसदी भी नहीं है।
अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश थाना और चौकी प्रभारी साइबर अपराध की तकनीकी जानकारी से वंचित हैं, जिसके कारण कई मामलों को साइबर थाने ट्रांसफर करना पड़ता है।
इंस्पेक्टर व दरोगा को थाना प्रभारी बनने के लिए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा करना होगा और परीक्षा पास करनी होगी। इसके तहत हैकिंग, डेटा चोरी, डिजिटल फॉरेंसिक, ऑडियो-वीडियो एनालिसिस, पासवर्ड रिकवरी और साइबर सबूत जुटाने की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी:
डॉ. कौस्तुभ, एसएसपी