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पेशे से डॉक्टर हैं पुनीत लेकिन कर रहे हैं खेती, इस वजह से छोड़ दिया क्लीनिक

Thu, 14 Jan 2021 12:00 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

  • लखनऊ में थी दांतों की क्लीनिक, मन नहीं लगा तो करने लगे किसानी
  • कैंसर, शुगर और दिल की बीमारी में बेहद असरदार होता है काला गेहूं
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डॉ. पुनीत काले गेंहू की प्रजाति की खेती करते हैं। - फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर शहर के शाहपुर निवासी डॉ. पुनीत भारद्वाज पेशे से डॉक्टर हैं, लेकिन किसानी कर रहे हैं। हालांकि, उनकी किसानी भी स्वास्थ्य से ही जुड़ी है। डॉ. पुनीत काले प्रजाति के गेहूं की खेती करते हैं। यह गेहूं कैंसर, शुगर और दिल की बीमारियों में बेहद असरदार होता है। कृषि कार्य से उन्हें राष्ट्रीय स्तर की पहचान मिली है।

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जानकारी के मुताबिक, डॉ. पुनीत भारद्वाज बच्चों के दांतों की बीमारियों के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 में पीजी की पढ़ाई के बाद बच्चों के दांतों का इलाज शुरू किया। लखनऊ में क्लीनिक खोलकर आठ साल तक इलाज किया, लेकिन इस काम में मन नहीं लगा। इसके बाद खेती करने का फैसला किया। खेती में कुछ अलग करने की चाह थी तो काले गेहूं की खेती करनी शुरू की।

डॉ. पुनीत ने बताया कि काला गेहूं चंडीगढ़ की नाबी संस्था ने प्रयोग के तौर पर उत्पादित किया। काले गेहूं में सामान्य गेहूं की अपेक्षा प्रोटीन, आयरन और फाइबर तीन गुना अधिक होता है। काले गेहूं में पिग्मिंट एंथोसाइनीन पाया जाता है।
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यह पिग्मिंट एंटी-ऑक्सीडेंट होता है। सामान्य गेहूं में महज पांच पीपीएम पाया जाता है, जबकि काले गेहूं में यह 135 से 140 पीपीएम मिलता है। इसका प्रयोग शुगर, दिल और कैंसर की बीमारियों में होता है। यह मोटापा कम करता है।

औषधीय गुणों के कारण ही इसकी मांग अधिक है। देश भर की कई बड़ी संस्थाएं इसे खरीदती हैं। उन्होंने बताया कि वह काले गेहूं के साथ ही काले चावल का भी उत्पादन कर रहे हैं। इसमें भी पिग्मिंट एंथोसाइनीन पाया जाता है।

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