इस मुद्दे को लेकर अभिभावक संघ ने कोराेना काल के दौरान लड़ाई लड़ी थी। स्थानीय प्रशासन से शिकायत भी की गई, लेकिन कोई हल नहीं निकला। कोर्ट ने हमारी परेशानियों को समझते हुए फीस में 15 फीसदी छूट का फैसला दिया। सरकार की ओर से आदेश जारी होने के बाद भी उसका पालन नहीं होना बड़ी विडंबना है।
- अनुराग त्रिपाठी, अध्यक्ष, अभिभावक संघ।
फीस में छूट दिए जाने के सिलसिले में स्कूल प्रबंधन से बातचीत की गई, लेकिन कोई हल नहीं निकला। स्कूल प्रबंधन की ओर से कहा जा रहा है कि अगर ऐसा कोई आदेश आपके पास आया हो तो हमें दिखाइये, हमारे पास तो नहीं आया है। खुलेआम निजी स्कूलों की ओर से मनमानी चल रही पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
- आदित्य जायसवाल, अभिभावक।
कोर्ट और सरकार के आदेश का पालन करते हुए स्कूलों की ओर से फीस वापस की जानी चाहिए। आदेश को कौन नहीं मान रहा, यह भी सामने आना चाहिए। शायद सरकार के आदेश को लागू कराने में जिला प्रशासन लापरवाही बरत रहा है। सख्ती न होने के कारण ही अब तक राहत नहीं मिली। देखते हैं कब तक इस मुद्दे को देखा, सुना और समझा जाएगा।
- हिमांशु यादव, अभिभावक।
सरकार की ओर से आदेश तो जारी हो गया पर स्थानीय स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा है। कोरोना काल में एक्स्ट्रा करिकुलर गतिविधियों के नाम पर फीस वसूल की गई जो सरासर मनमानी थी। अब भी अन्य गतिविधियों के नाम पर फीस ली जाती है। लेकिन हफ्ते में मुश्किल से इनकी दो कक्षाएं ही चलती हैं। 15 फीसदी फीस माफी जल्द होनी चाहिए।
- विमल, अभिभावक।