नगर निगम के स्टोर में बैट्री चालित गाड़ियां खड़ी- खड़ी गल रही हैं। इनके टायर और ट्यूब खराब हो गए हैं। इनकी बैट्रियां भी गायब हो चुकी हैं।
प्रदूषण रोकने के लिए मंगाए गए थे वाहन
नगर निगम ने बैट्री चालित ई-रिक्शा का इंतजाम यह सोचकर किया था कि इनकी पहुंच तंग गलियों में भी हो सकेगी और वायु प्रदूषण पर भी नियंत्रण होगा। नगर निगम से जुड़े लोगों का कहना है कि कम खर्च में कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों को लंबे समय तक चलाने के लिए गंभीरता नहीं दिखाई गई, जिससे यह नौबत आई। ये अब पूरी तरह से कबाड़ हो चुके हैं।
किसी ने नहीं किया गया हिसाब-किताब, बदलते रहे अधिकारी-कर्मचारी
नगर निगम के बजट से 40 लाख रुपये खर्च करके मंगाए गए 20 बैट्री चालित वाहन क्यों और कैसे खराब हो गए। इसका हिसाब किसी ने नहीं किया। इस दौरान अधिकारी और कर्मचारी बदलते रहे। वर्तमान में तैनात अधिकारियों को इन वाहनों के संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
उप नगर आयुक्त संजय शुक्ला ने कहा कि इन वाहनों के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। वाहन कब खरीदे गए? उनका उपयोग क्यों नहीं किया जा सका। इसके बारे में जानकारी करने के बाद ही कुछ कह पाएंगे।