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हड़ताल पर रहे प्राइवेट डॉक्टर, अस्पतालों में देखे गए सिर्फ इमरजेंसी मरीज

Fri, 11 Dec 2020 07:59 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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प्रदर्शन करते डॉक्टर। - फोटो : अमर उजाला।
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आयुर्वेदिक चिकित्सकों को भी सामान्य सर्जरी की अनुमति दिए जाने से नाराज एलोपैथिक के प्राइवेट डॉक्टरों ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर शुक्रवार को हड़ताल कर विरोध जताया। सामान्य मरीजों के लिए ओपीडी बंद रही, केवल इमरजेंसी वाले मरीज ही देखे गए।

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उधर, मिक्सोपैथी के खिलाफ आईएमए के समर्थन में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने कॉलेज के गेट पर प्रदर्शन किया। इस दौरान उनके हाथों में ‘नो से टू मिक्सोपैथी’ लिखी तख्तियां थीं।

आईएमए ने हड़ताल की घोषणा पहले ही कर दी थी लिहाजा ज्यादातर प्राइवेट डॉक्टरों ने सामान्य व रूटीन मरीजों को शुक्रवार को ओपीडी में नहीं आने की सलाह दी थी। फोन पर नंबर लगाए जाने के दौरान भी कर्मचारियों ने डॉक्टरों के ओपीडी नहीं करने की सूचना दी। जिससे मरीजों को बहुत दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा। जो मरीज गंभीर स्थिति में आए, उनका डॉक्टरों ने इलाज किया।
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हड़ताल का असर पैडलेगंज से लेकर छात्र संघ चौराहे और बेतियाहाता कसया रोड पर स्पष्ट देखने को मिला। इन दोनों ही मार्गों पर ज्यादातर प्रमुख डॉक्टरों के क्लिनिक व अस्पताल हैं। सामान्य दिनों में पूरे दिन यहां जाम लगा रहता है मगर शुक्रवार को वहां से आराम से गाड़ियों का आवागमन होता दिखा।


 

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जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी रही लाइन

हड़ताल की वजह से जिला अस्पताल में मरीजों की लाइन लगी रही। जिन्हें हड़ताल की सूचना नहीं थी, ऐसे तमाम मरीजों ने प्राइवेट डॉक्टरों के वहां से वापस होने पर जिला अस्पताल की राह पकड़ ली। सरकारी अस्पतालों पर हड़ताल का कोई असर नहीं था। सभी विभागों की ओपीडी खुली थी। डॉक्टर मरीजों को देख रहे थे। जिला अस्पताल प्रशासन को पहले ही हड़ताल के मद्देनजर भीड़ बढ़ने की आशंका थी लिहाजा जरूरी तैयारियां कर ली गईं थीं।

सर्जरी कर देना ही मुकम्मल इलाज नहीं
आयुर्वेंदिक चिकित्सकों को सर्जरी का अधिकार देने से खफा आईएमए के सदस्यों ने सीतापुर आई हास्पिटल के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया। इस दौरान एसोसिएशन की बैठक भी हुई।

सचिव डॉ.  वीएन अग्रवाल ने कहा कि आयुर्वेद के डॉक्टरों को उनकी ही पैथी के काम सौंपकर बेहतर परिणाम लिए जा सकते हैं। मगर सर्जरी वही कर सकता है जिसने इसकी पढ़ाई की हो। केवल सर्जरी कर देना इलाज नहीं होता है, उसके साइट इफेक्ट को पहचानना और उसके हिसाब से दवा देना जरूरी है। यह काम सर्जन ही कर सकता है।

मीडिया प्रभारी डॉ. अमित मिश्रा ने कहा कि सरकार को चाहिए सभी पैथियों का स्वतंत्र विकास करे। दो पैथियों को एक में न मिलाए, इसके नतीजे अच्छे नहीं आएंगे। बैठक को डॉ. डीके सिंह, डॉ. आरपी त्रिपाठी, डॉ. एपी गुप्ता, डॉ. आरपी शुक्ला, डॉ. एके चतुर्वेदी, डॉ. दीप्ति चतुर्वेदी, डॉ. आनंद अग्रवाल व डॉ. शांतनु अग्रवाल ने भी संबोधित किया।


 
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