हड़ताल की वजह से जिला अस्पताल में मरीजों की लाइन लगी रही। जिन्हें हड़ताल की सूचना नहीं थी, ऐसे तमाम मरीजों ने प्राइवेट डॉक्टरों के वहां से वापस होने पर जिला अस्पताल की राह पकड़ ली। सरकारी अस्पतालों पर हड़ताल का कोई असर नहीं था। सभी विभागों की ओपीडी खुली थी। डॉक्टर मरीजों को देख रहे थे। जिला अस्पताल प्रशासन को पहले ही हड़ताल के मद्देनजर भीड़ बढ़ने की आशंका थी लिहाजा जरूरी तैयारियां कर ली गईं थीं।
सर्जरी कर देना ही मुकम्मल इलाज नहीं
आयुर्वेंदिक चिकित्सकों को सर्जरी का अधिकार देने से खफा आईएमए के सदस्यों ने सीतापुर आई हास्पिटल के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया। इस दौरान एसोसिएशन की बैठक भी हुई।
सचिव डॉ. वीएन अग्रवाल ने कहा कि आयुर्वेद के डॉक्टरों को उनकी ही पैथी के काम सौंपकर बेहतर परिणाम लिए जा सकते हैं। मगर सर्जरी वही कर सकता है जिसने इसकी पढ़ाई की हो। केवल सर्जरी कर देना इलाज नहीं होता है, उसके साइट इफेक्ट को पहचानना और उसके हिसाब से दवा देना जरूरी है। यह काम सर्जन ही कर सकता है।
मीडिया प्रभारी डॉ. अमित मिश्रा ने कहा कि सरकार को चाहिए सभी पैथियों का स्वतंत्र विकास करे। दो पैथियों को एक में न मिलाए, इसके नतीजे अच्छे नहीं आएंगे। बैठक को डॉ. डीके सिंह, डॉ. आरपी त्रिपाठी, डॉ. एपी गुप्ता, डॉ. आरपी शुक्ला, डॉ. एके चतुर्वेदी, डॉ. दीप्ति चतुर्वेदी, डॉ. आनंद अग्रवाल व डॉ. शांतनु अग्रवाल ने भी संबोधित किया।