मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश कोरोना पर अंतिम विजय की ओर बढ़ रहा है। प्रदेश में जिस तरह इंसेफेलाइटिस को नियंत्रित किया गया, उसी प्रकार कोरोना को भी नियंत्रित किया जाएगा। इस कार्य के लिए एम्स, गोरखपुर एक बेहतरीन उदाहरण बन सकता है। टीम वर्क हमें बेहतर परिणाम दे सकता है। सकारात्मक भाव बनाकर आगे बढ़ने की जरूरत है। सीएम योगी ने कहा, एक साल में पूर्ण विकसित गोरखपुर एम्स का उद्घाटन पीएम मोदी करेंगे।
मुख्यमंत्री बृहस्पतिवार को एम्स में आयोजित ‘स्वस्थ पूर्वी उत्तर प्रदेश- एक पहल’ गोष्ठी के शुभारंभ मौके पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि टीकाकरण के साथ ही अन्त: विभागीय समन्वय बनाकर प्रदेश सरकार ने इंसेफेलाइटिस को नियंत्रित किया। संबंधित विभागों ने एक अभियान के तहत जुड़कर बेहतर परिणाम दिए। स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर घर को शौचालय, शुद्ध पेयजल, साफ सफाई आदि के माध्यम से इंसेफेलाइटिस को पूरी तरह नियंत्रित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तारीकरण की दिशा में निरंतर काम कर रही है और हेल्थ इंफ्रास्ट्रकचर को बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश के अंदर मेडिकल कालेजों की संख्या बढ़ाई जा रही है और गोरखपुर मेडिकल कालेज में पूर्व की अपेक्षा काफी बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध हैं।
यहां नए संस्थान स्थापित हो रहे हैं। सुपर स्पेशियालिटी सेंटर ने कोरोना काल में अपनी बेहतर सेवाएं प्रदान की हैं। उन्होंने कहा कि बीमारियों का सबसे बड़ा उपचार बचाव होता है, इलाज द्वितीय है। अतिथियों का स्वागत एम्स की निदेशक प्रो. सुरेखा किशोर ने किया और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सेहत की पूरी रूपरेखा प्रस्तुत की। संचालन व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रियंका द्विवेदी व डॉ. अमरप्रीत कौर ने किया।
चिकित्सक का मरीजों के प्रति संवेदनशील होना जरूरी
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि शासन हर स्तर से सहयोग के लिए तत्पर है। उन्होंने सलाह दी कि तकनीकी को अपनाने में कोताही न बरती जाए। कोरोना काल ने तकनीकी के प्रति अग्रणी बनाया है। उन्होंने चिकित्सकों से कहा कि उन्हें मरीजों के प्रति भावनात्मक, उदार एवं संवेदनशील होना चाहिए तभी सफलता सिद्ध होगी। मरीजों को पीड़ा से निजात दिलाना उनका परम कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष तक एम्स को जनता के लिए पूर्ण रूप से समर्पित कर दिया जाएगा।
प्रकृति की दृष्टि से बहुत संपन्न है पूर्वी उत्तर प्रदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश, प्रकृति की दृष्टि से बहुत समृद्ध है। यही वजह है कि देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा यहां रहता है। कहा कि गोरखपुर-बस्ती मंडल, पूर्वी-उत्तरी बिहार व नेपाल के लगभग पांच करोड़ लोगों की स्वास्थ्य सेवा की जिम्मेदारी गोरखपुर पर है। जब हम समस्या को ठीक से समझ लेते हैं तो बेहतर परिणाम आता है। यहां लोगों ने लंबे समय तक इंसेफेलाइटिस से होती मौतों को देखा है। 38 जिले सीधे इस बीमारी से प्रभावित थे।
1977 से मौतें हो रहीं थीं। इस बीमारी की चपेट में आए लोग वोट बैंक तो बने लेकिन इनके बारे में किसी भी दल ने सत्ता में आने के बाद सोचा नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सांसद रहते हुए उन्होंने इसे सदन में उठाया। जब मुख्यमंत्री बने तो इसकी रोकथाम के लिए प्रभावी कार्रवाई शुरू की। नतीजा आज सभी के सामने है। पहले जहां एक साल में 600 से 1200 मौतें होती थीं, इस साल वह संख्या सिमट कर 21 से 25 पर आ गई है। उन्होंने कहा कि कोरोना के प्रबंधन और नियंत्रण में भी यूपी पूरी तरह सफल रहा। यहां कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या सिर्फ 1.04 फीसद है।
ये भी रहे मौजूद-
इस अवसर पर चिकित्सा मंत्री जयप्रकाश सिंह, अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी, आर्थिक सलाहकार मुख्यमंत्री केवी राजू, गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. राजेश सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज डॉ. गणेश, आदि उपस्थित रहे।
ई-आरोग्य एप का भी किया उद्घाटन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मौके पर ई-आरोग्य एप का भी उद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि इससे पंजीकरण, डिजिटल भुगतान, डिजिटल रिकॉर्ड आदि में काफी आसानी होगी। साथ ही मुख्यमंत्री ने हिंदी पखवाड़ा व स्वच्छता पखवाड़ा की स्मारिका का विमोचन करते हुए एम्स को स्वस्थ पूर्वी उप्र एक पहल, संगोष्ठी को आगे बढ़ाने के कार्य के प्रति अपनी शुभकामनाएं एवं बधाई दी।