बीआरडी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में आने वाली 90 फीसदी गर्भवती कोरोनारोधी वैक्सीन लगवाने में हिचकिचा रहीं हैं। उन्हें डर है कि कहीं उनके गर्भ में पल रहे बच्चे को कोई खतरा न हो जाए। गर्भवतियों का कहना है कि अगर उनके गर्भस्थ शिशु की गारंटी कोई भी जिम्मेदार ले लें, तो टीका लगवा लेंगी। लेकिन, इतनी बड़ी जिम्मेदारी कोई भी डॉक्टर क्यों लेना चाहेगा। डॉक्टरों का कहना है कि यह बेहद चिंता का विषय है। काफी समझाने के बाद भी 90 फीसदी गर्भवती बिना वैक्सीन लगवाएं ही लौट रही हैं।
गर्भवती भी मिल चुकी हैं संक्रमित
तीसरी लहर में भी गर्भवती कोरोना संक्रमित मिल चुकी हैं। लेकिन, राहत की बात यह है कि जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह से सुरक्षित रहे हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग की विभागाध्यक्ष डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि पहली, दूसरी और तीसरी लहर में काफी गर्भवती संक्रमित मिलीं। सभी स्वस्थ भी हुईं। बच्चे को कोई भी खतरा नहीं हुआ है। कई ऐसी भी गर्भवती हैं, जिन्होंने कोरोनारोधी टीका लगवाया है। टीका पूरी तरह से सुरक्षित और असरदार है। इसलिए गर्भवती बेहिचक वैक्सीन लगवा सकती हैं।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एएन प्रसाद ने कहा कि कोरोनारोधी टीका पूरी तरह से सुरक्षित और असरदार है। आईसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक, गर्भवती को वैक्सीन लगाई जा सकती है। ऐसे में कोई भी गर्भवती इसे लेकर भ्रम में न रहें। कोरोनारोधी वैक्सीन गर्भस्थ शिशु के लिए भी पूरी तरह से सुरक्षित है।
केस- एक
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में तीन माह की गर्भवती जांच के लिए पहुंची। जांच के दौरान वैक्सीन लगवाने को कहा तो जवाब मिला कि बहुत मुश्किल से गर्भधारण हुआ है। कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। दूसरी बार मुश्किल से गर्भ ठहरा है, यदि मेरे बच्चे की सुरक्षा की गारंटी दें तो मैं कोरोना वैक्सीन लगवा लूंगी।
केस-दो
शहर की रहने वाली एक पांच माह की गर्भवती महिला अस्पताल में जांच के लिए आई थी। जांच के दौरान बच्चा स्वस्थ मिला। स्वास्थ्यकर्मियों ने वैक्सीन लगने की बात पूछी। गर्भवती ने बताया कि उसने वैक्सीन नहीं लगवाई है। स्वास्थ्यकर्मियों ने टीका लगाने को कहा, तो उन्होंने साफ मना कर दिया। बोली, जब तक बच्चा नहीं हो जाता, वैक्सीन नहीं लगवा सकती।