गोरखपुर के जंगल कौड़िया चौकी के तहत अगम्य हॉस्पिटल में 13 फरवरी के दिन एक महिला का सर्जरी द्वारा प्रसव के बाद एक पुत्री का जन्म हुआ। इसके बाद प्रसूता की तबीयत बिगड़ती चली गई और रात 11 बजे उसकी मृत्यु हो गई। मृतक की शादी डेढ़ वर्ष पहले हुई थी। मृत लड़की के मायका पक्ष ग्राम रमवापुर, थाना पीपीगंज है। मृतक के ससुराल पक्ष के लोग मृत शरीर को लेकर भोर में चार बजे जंगल कौड़िया अगम्य अस्पताल पर पहुंचे और डॉक्टर को बातचीत करने के लिए फोन से बुलाने का प्रयास किया। जब डॉक्टर नहीं आए तो परिजन हंगामा करने लगे।
सूचना मिलते ही जंगल कौड़िया चौकी से उप निरीक्षक और सिपाही पहुंचे। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी पीपीगंज धर्मेंद्र सिंह भी पहुंचे। परिजन स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बताकर डॉक्टर को गिरफ्तार करने की मांग करने लगे। परिजनों ने शांतिपूर्ण तरीके से गोरखपुर सोनौली मार्ग को भी जाम करने का प्रयास किया परंतु थाना प्रभारी के आश्वासन के बाद परिजनों ने तहरीर देकर उचित कार्रवाई की मांग की। जिसके बाद शुक्रवार की सुबह लगभग साढ़े नौ बजे पुलिस ने पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीपीगंज, कैंपियरगंज और चिलुआताल थाने से करीब 12 उप निरीक्षक और अनेक कांस्टेबल मौके पर आ गए। जिसके चलते जंगल कौड़िया छावनी में तब्दील हो गया था।
मृतका के पति सुमंत गिरी ने थाना प्रभारी पीपीगंज को तहरीर देकर बताया कि वह थाना सहजनवा के गोहरा गांव के निवासी हैं। पत्नी रेशमा देवी (25 वर्ष) अगम्य हॉस्पिटल जंगल कौड़िया में डॉ. प्रभात दीक्षित से रुटीन चेकअप कराने आई थी। डॉक्टर ने बिना परिजनों के अनुमति के ही 13 फरवरी के दिन 2 बजे प्रसव के लिए ऑपरेशन कर दिया। डॉक्टर और अस्पताल की लापरवाही और मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई। इसके बाद डॉक्टर अपनी प्राइवेट गाड़ी से मृतक को लेकर गोरखपुर स्थित आनंदलोक अस्पताल गया और वहां मृत शरीर को छोड़कर भाग गया। परिजन एंबुलेंस की सहायता से मरीज को सिटी हॉस्पिटल लेकर पहुंचे तो वहां के डॉक्टरों ने पत्नी को मृत घोषित कर दिया। प्रार्थी ने डॉक्टर प्रभात दीक्षित और सहयोगियों के विरुद्ध विधिक धारा में मुकदमा करने की गुहार लगाई है।
लोगों ने कहा इस अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर और भर्ती वार्ड बेसमेंट में संचालित होता है जो नियम के विपरीत है। सर्जरी के समय किसी बाहरी सर्जन को नहीं बुलाया गया था। अस्पताल में वेंटिलेटर और आईसीयू की भी सुविधा नहीं उपलब्ध है।
आपको बताते चलें कि 9 दिसंबर 2024 को क्षेत्र की एक महिला के शिशु का भी जन्म सर्जरी के द्वारा इसी अस्पताल में किया गया था उस समय भी अस्पताल में आईसीयू और एनआईसीयू सुविधा न होने के चलते, शिशु की मृत्यु हो गई थी इसके बाद परिजनों ने मृत शरीर को सड़क पर रखकर घंटों हंगामा किया था। मामले से संबंधित खबर भी प्रकाशित की गई थी।
इस तरह की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अस्पताल को सील किया जाएगा, बेसमेंट में ऑपरेशन थिएटर और वार्ड चलने की शिकायत इसके पूर्व भी आ चुकी है।
- डॉ मीनू सोनी, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक- यूनानी अधिकारी गोरखपुर।