मलौनी बंधे पर करीब पांच किलोमीटर तक जगह-जगह रेनकट मिले। इसमें कुछ तो ऐसे हैं जो बाढ़ आने पर पानी की धार से बंधे को धराशायी कर देंगे। कठउर में बंधे से रमेश के घर तक जाने वाले मोड़ पर बड़ा गड्ढा मिला। यहां से आगे सेमरा देवी प्रसाद गांव के सामने रामसजीवन की जनरल स्टोर की गुमटी के पास रेनकट से बिजली का खंभा लटका था। रामसजीवन ने बताया कि बारिश से मिट्टी बह गई है तो यह पोल लटक गया है। यदि यह सड़क पर गिर गया तो किसी राहगीन की जान चली जाएगी। यहां से आगे खिरवनिया शिव मंदिर के पास रेनकट बन गए हैंं।
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ग्रामीणों ने बताया कि तेज बारिश होने पर मिट्टी के साथ पिच रोड भी बह जा रही है। इसका एक ही उपाय है कि बालू भरी बोरियां डालकर मरम्मत की जाए। इस बंधे से सेंदुली बेंदुली, लहसड़ी, डुहिया, विशुनपुरा, लालपुर टीकर, भसवा, नदुआ, बीस बिगहा, चिरइहवा, हथिया परास, नौवा डुमरी, कजाकपुर कालोनी, सेंदुली बेंदुली, गायघाट, बरबसपुर सहित अन्य गांवों की सुरक्षा होती है। कमोवेश यही हालत राप्ती और रोहिन नदी के अन्य जगहों पर बंधों की हो गई है।
पाली क्षेत्र के मटियारी के पास राप्ती नदी के बढ़ाव से लोग डर गए हैं। मटियारी के रामेंद्र मिश्र ने बताया कि जलस्तर ऐसे ही बढ़ता रहा तो भक्शा में कुछ दिनों में पानी घुस जाएगा। जंगल कौड़िया प्रतिनिधि के अनुसार रोहिन नदी का जलस्तर बीते दो दिनों से तेजी से बढ़ा है। इससे गायघाट, गंगटा, चिउटहा आदि गांव के लोगों को बाढ़ का डर सताने लगा है। मानीराम-कुदरिहा बांध की मरम्मत तीन माह पूर्व हुई थी।
इस बंधे पर जगह- जगह रेनकट हो गए हैं। क्षेत्र के रामहरक, कोमल, दयानंद ने बताया कि बाढ़ का खतरा बना हुआ है। गोला प्रतिनिधि के अनुसार सरयू नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। कटान वाले स्थानों पर बोल्डर पीचिंग का कार्य हो जाने से कटान का खतरा कम हुआ है। नदी के किनारे पर बारानगर, तीरागांव, कोहना, बिसरा व रामामऊ की ओर बाढ़ का पानी चढ़ रहा है।