रजिस्ट्री दफ्तर में ऐसी कोई जांच नहीं की जाती है, जिससे पता चल सके कि जिस जमीन का बैनामा करवा रहे हैं, वह साफ-सुथरी है की नहीं। जालसाज चौहद्दी गलत दिखाकर आसानी से दूसरे की जमीन को बेच देते हैं। मामला दाखिल-खारिज या बैनामे के बाद कब्जा लेने के समय पकड़ में आता है। तब तक बहुत देर हो चुकी होती है और लोग ठगे जा चुके होते हैं।
केस एक
सूबेदार को कर दी दूसरे की जमीन की रजिस्ट्री
जालसाज ने सेना के सूबेदार को दूसरे की जमीन रजिस्ट्री कर दी। देवरिया के ग्राम महुआपाटन निवासी दिनेश कुमार गुप्ता भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर सेवारत हैं। उन्होंने अपनी पत्नी संतोषी जायसवाल के नाम से महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर तीन में प्रापर्टी डीलर मनोज सिंह के माध्यम से गाटा संख्या 389 मि. गाटा संख्या 390 में 1744 वर्ग फिट जमीन क्रय किया। बाद में कब्जा लेने गए, तो जालसाजी की जानकारी हुई। इस मामले में एसएसपी के आदेश पर शाहपुर पुलिस ने केस दर्ज किया। पीड़ित ने वकील के माध्यम से नोटिस चस्पा कर दिया है। दिनेश बताते हैं, कोई और न फंसे इस वजह से ऐसा किया है।
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केस दो
दिल्ली वालों की जमीन हड़प ली
9 अप्रैल 2023 को पुलिस ने दिल्ली में रहने वाले एक परिवार के पट्टीदारों पर जालसाजी का केस दर्ज किया। दरअसल, पीपीगंज के नया गांव निवासी अब्दुल हकीम 35 वर्ष से दिल्ली में रहते हैं। उनके पिता अकबर को बड़गो गांव में नेवासे पर भूमि मिली, जिसकी देखरेख वह करते थे। 2014 में अकबर की मृत्यु हो गई। जिसके बाद भूमि की देखरेख करने वाला कोई नहीं था। इसका फायदा उठाते हुए हकीम के पट्टीदार रहमान व मैनुद्दीन ने गलत तरीके से भूमि अपने नाम करा ली। इनके वकील ने भी नोटिस चस्पा कर दी है।
केस तीन
बिहार वालों की जमीन कईयों को बेची
27 फरवरी 2023 को खोराबार पुलिस ने 1.92 करोड़ रुपये की जालसाजी के आरोप में शैलेंद्र पासवान को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि शैलेंद्र ने विवादित जमीन को कई लोगों को बेचा था। अमरावती की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपी को जेल भेजने की कार्रवाई की। अमरावती बिहार की रहने वाली हैं। बार-बार शहर आ नहीं सकती हैं। ऐसे में इनके वकील सुभाष ने नोटिस चस्पा कर दी है। वकील बताते है, कई लोगों से जालसाजी की है, इस वजह से नोटिस चस्पा कर दी है, ताकि लोग अमरावती से आसानी से संपर्क कर जालसाजी से बच सके।
जमीन का मालिकाना हक: जमीन खरीदते वक्त आपको इस बात की जांच करनी है कि जो शख्स आपको जमीन बेच रहा है, वही प्रॉपर्टी का असली मालिक है और उसके पास ही सारे अधिकार हैं। जमीन के दस्तावेज काफी जटिल होते हैं। बेहतर है कि इन दस्तावेजों की जांच आप किसी वकील से करवाएं। कम से कम पिछले 30 वर्षों के लिए टाइटल का पता जरूर लगाएं।
सब-रजिस्ट्रार के दफ्तर में खोज: अधिग्रहण किए जाने वाली भूमि के संबंध में लेनदेन (कर्मों के माध्यम से स्वामित्व में परिवर्तन) और एन्कंब्रन्स (कानूनी बकाया) की खोज आपको सब रजिस्ट्रार के दफ्तर में करनी होगी।
जमीन खरीद के लिए पब्लिक नोटिस: प्रॉपर्टी खरीदने से पहले खरीदी जाने वाली भूमि पर किसी भी दावे को आमंत्रित करने के लिए स्थानीय अखबारों में पब्लिक नोटिस देनी चाहिए, इससे यह पता लग जाता है कि जमीन पर किसी थर्ड पार्टी के अधिकार तो नहीं हैं।
पावर ऑफ अटॉर्नी: जमीन मालिक की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए भी बेची जाती है। पावर ऑफ अटॉर्नी की अच्छी तरह से जांच करनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वही प्रॉपर्टी बेची जा रही है, जिसे आपको खरीदना है। ऐसा भी होता है जब कुछ समय के भीतर कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना जरूरी होता है, इसमें देरी नहीं होनी चाहिए, इससे लागत बढ़ती है। ऐसी स्थितियों से बचने के लिए आप किसी और को अपनी ओर से हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत कर सकते हैं।
दस्तावेजों का वेरिफिकेशन: भूमि लेनदेन से जुड़े असली टाइटल दस्तावेज सही हैं या नहीं, सौदे से पहले इस बात की जांच जरूर कर लेनी चाहिए। ऐसा करने से आपको पता चल जाएगा कि विक्रेता ने ओरिजनल के साथ कोई थर्ड पार्टी राइट्स नहीं बनाए हैं, सौदा पूरा होने के बाद इन ओरिजनल दस्तावेजों को जरूर ले लें।
जमीन खरीद के लिए अप्रूवल और परमिशन: खरीदी जाने वाली प्रॉपर्टी/जमीन में पहले से ढांचे या इमारतें हैं, तो यह जांच करें कि अनुमोदित योजनाएं, आवश्यक अनुमतियां और एनओसी सही हैं या नहीं।
प्रॉपर्टी टैक्स: यह जरूर जांच करें कि जिस जमीन को आप खरीद रहे हैं, उसके प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान ट्रांसफर की तारीख तक की जा चुकी है और वेरिफिकेशन के लिए इस भुगतान की मूल रसीदें तैयार हैं। यह भी पता लगाएं कि वेंडर के नाम पर खाता (मालिक के नाम को दर्शाती रेवेन्यू रिकॉर्डिंग) उपलब्ध है।
कहीं जमीन गिरवी तो नहीं रखी गई: इस बात की भी जांच करनी चाहिए कि जमीन गिरवी रखी गई है या नहीं। जमीन खरीदने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि विक्रेता ने भूमि पर बकाया सभी राशियों का भुगतान किया है। यह निर्धारित करने के लिए कि भूमि सभी लोन से मुक्त है, बैंक से एक रिलीज सर्टिफिकेट जरूरी है।