मेयर बनने के बाद भी आशा देवी कार की जगह रिक्शा से चलती थीं। रिक्शे पर लाल बत्ती लगाकर उनके नगर निगम पहुंचने की सूबे में खूब चर्चा रही। दिवंगत आशा देवी के मोहल्ले की रहने वाली सुभावती मल्ल ने बताया कि उनका स्वभाव बहुत अच्छा था। वह हम लोगों के लिए शुभ थीं। मेयर बनने के बाद भी उनका व्यवहार बिल्कुल नहीं बदला।
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बोली- बाबू हमको याद है कि उनके मेयर चुने जाने पर खूब हल्ला हुआ। हम लोगों को लगा कि वह बदल जाएंगीं, लेकिन वह पहले की तरह से अपने समाज के लोगों के साथ जुड़कर अपना काम भी करतीं रहीं। मोहल्ले में किसी से भी पूछेंगे तो वह उनको अच्छा ही कहेगा। बाद में किडनी की बीमारी से पीड़ित होने की वजह से जून 2013 में आशा देवी का निधन हो गया।
मेयर का चुनाव लड़ने के लिए आशा देवी ने 10 हजार रुपये का कर्ज लेकर अपनी जमानत राशि जमा कराई। पुरुष किन्नर होने की वजह से आशा का पर्चा खारिज होने का खतरा भी था। हालांकि गोरखपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी देवेश चतुर्वेदी ने आशा देवी का पर्चा मान लिया। उनके प्रचार के लिए मध्य प्रदेश से किन्नर विधायक शबनम मौसी भी आई थीं।
चुनाव का नतीजा जब आया तो सपा से अंजू चौधरी को 44545 वोट मिले। भाजपा की विद्यावती को 29545 वोट, जबकि आशा देवी को 1,09849 वोट मिले थे। इस चुनाव में सपा के अतिरिक्त सभी की जमानत जब्त हो गई थी।
मधु को आशा देवी ने लिया था गोद
तिवारीपुर, नरसिंहपुर के मूल निवासी आशा देवी उर्फ अमरनाथ के अन्य भाई जयनाथ यादव और रामनाथ यादव हैं। जयनाथ की बेटी मधु को आशा देवी ने गोद ले लिया था। पांच भाई बहनों में दूसरे नंबर के मधु की शादी वर्ष 2011 में रमेश यादव संग हुई थी।