डाकघर में 11 लाख खाताधारक हैं, लेकिन वर्तमान में केवल डेढ़ लाख ग्राहकों का खाता प्रतिमाह संचालित किया जा रहा है। इसके बावजूद विभाग एक ग्राहक सम्मानित करने के लिए नहीं खोज सका। जबकि संयुक्त निदेशक वित्त डाकघर, पवन सिंह ने अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में सभी डाकघरों को तीन ग्राहक, तीन राष्ट्रीय बचत अभिकर्ता और तीन महिला प्रधान अभिकर्ताओं को सम्मानित करने का निर्देश दिया था।
नेशनल स्माल सेविंग एजेंसी एसोसिएशन के सचिव मनोज मिश्रा ने बीते दिनों सूचना के अधिकार से डाकविभाग से सूचना मांगी थी। जवाब में बताया गया कि एक मार्च 2021 से 30 नवंबर 2021 तक गोरखपुर मंडल में काम करने वाली किसी भी महिला प्रधान व राष्ट्रीय बचत अभिकर्ता को सम्मानित नहीं किया गया है।
यही नहीं प्रभावी रूप से खाता संचालित करने वाला कोई ग्राहक भी नहीं मिला है। 19 दिसंबर को अमृत महोत्सव समाप्त होने के बाद 18 जनवरी 2022 को इस संबंध में मनोज मिश्र ने डीजीएफ को पत्र लिखकर मामले की जानकारी दी। मनोज का कहना है कि डाक विभाग ने अपने शीर्ष अधिकारियों के निर्देश के बाद भी तीन क्या, एक भी ग्राहक या अभिकर्ता को सम्मानित नहीं किया।
डाक विभाग का अभिकर्ता विभाग के रीढ़ की हड्डी होता है। डाकघर में जमा होने वाली धनराशि का अधिकांश भाग अभिकर्ताओं के माध्यम से जमा होता है, फिर भी अभिकर्ताओं की उपेक्षा की गई। आरटीआई की सूचना में बात खुली कि गोरखपुर ही नहीं आसपास के जिलों में भी आदेश का अनुपालन नहीं किया गया है। जानकार बताते हैं कि पहला मौका था जब डाकघर ने अपने ग्राहकों और अभिकर्ताओं को सम्मानित करने का फैसला किया था।
प्रवर डाक अधीक्षक मनीष कुमार ने कहा कि अभिकर्ता अस्थायी होते हैं। इनकी आईडी दो या तीन वर्ष तक सक्रिय रहती है। इसके बाद समाप्त हो जाती है। बहुत कम अभिकर्ता समय सीमा बढ़ाने का आवेदन करते हैं। ऐसे में किस डाकघर, उप डाकघर या शाखा डाकघर में उन्होंने खाता संचालित करवाया, इसकी जानकारी नहीं मिल पाती। ग्राहकों का खाता उनका निजी होता है। ऐसे में उन्हें उनके खाता संचालन पर पुरस्कृत करना गोपनीयता भंग करने जैसा हो जाता। इन्हीं कारणों से निर्देश का पालन नहीं किया जा सका।