गोरखपुर। गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव अब लगातार बदलते राजनीतिक समीकरणों के कारण दिलचस्प होता जा रहा है। भाजपा से टिकट के प्रमुख दावेदार रहे डॉ. संजयन त्रिपाठी को टिकट नहीं मिला तो उन्होंने निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला किया लेकिन इसके बाद घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया। संजयन त्रिपाठी ने सपा का दामन थाम लिया और सपा ने उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। अब लड़ाई सपा-भाजपा के इर्द-गिर्द सिमटती नजर आ रही है। हालांकि विभिन्न शिक्षक संगठनों के लोग अपनी जीत की दावेदारी कर रहे हैं।
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भाजपा ने ध्रुव त्रिपाठी पर जताया भरोसा
भाजपा ने इस सीट से लगातार तीन बार निर्वाचित एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी को अपना प्रत्याशी बनाया है। ध्रुव त्रिपाठी माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट से लंबे समय से जुड़े रहे हैं और वर्ष 2008, 2014 और 2020 में इसी निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी चुने गए। इस बार शर्मा गुट के 17 जिलाध्यक्षों के समर्थन की बात भी सामने आई है। जिलाध्यक्षों ने दो महीने पहले ही बैठक कर कहा था कि यदि ध्रुव त्रिपाठी भाजपा के प्रत्याशी होंगे तब भी शर्मा गुट उनका समर्थन करेगा। भाजपा का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले चुनाव में पार्टी ने इस सीट पर अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था।
उस चुनाव में ध्रुव त्रिपाठी शर्मा गुट के समर्थन से चुनाव जीते थे जबकि भाजपा नेता अजय सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में थे और दूसरे स्थान पर रहे थे। उन्हें वित्तविहीन शिक्षकों का समर्थन प्राप्त था। इस बार समीकरण बदला है।
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संजयन त्रिपाठी का पाला बदलना बड़ा घटनाक्रम
भाजपा से टिकट की दौड़ में शामिल रहे डॉ. संजयन त्रिपाठी को जब पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो उन्होंने पहले निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की। इसके बाद राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदला। सपा ने अपने पहले घोषित प्रत्याशी कमलेश यादव का नामांकन कार्यक्रम स्थगित किया और संजयन त्रिपाठी को पार्टी में शामिल कर उन्हें प्रत्याशी बना दिया। इस बदलाव से मुकाबले का स्वरूप भी बदल गया है। अब संजयन त्रिपाठी सीधे सपा के अधिकृत प्रत्याशी के रूप में भाजपा के ध्रुव त्रिपाठी के सामने होंगे। इससे पहले वह भाजपा के टिकट के दावेदार थे। अब देखना है कि संजयन को भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर कुछ नेताओं की सहानुभूति उनके साथ थी अब वह मिलेगी कि नहीं। दूसरी तरफ एक सपा नेता ने यह टिप्पणी की थी कि जिस कैडर ने एक साल से क्षेत्र में दौड़ लगाया लोगों से संपर्क किया उसे बैठा देना कहां तक उचित है। उसका क्या असर होगा आने वाला समय बताएगा।
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अजय सिंह समेत कई चेहरे मैदान में
इस चुनाव में अजय सिंह भी महत्वपूर्ण दावेदार हैं। इसके अलावा सीबीएसई स्कूल प्रबंधक संघ ने भी डॉ. संजयन त्रिपाठी को अपना प्रत्याशी घोषित किया था हालांकि बाद में उनके सपा में जाने से समीकरण बदल गए। राजीव यादव समेत अन्य दावेदार भी चुनाव मैदान में अपनी स्थिति बनाने में जुटे हैं। इस तरह मुकाबले में केवल भाजपा और सपा के प्रत्याशियों के बीच सीधी टक्कर नहीं रह गई है। शिक्षक संगठनों, निर्दलीय उम्मीदवारों और अलग-अलग राजनीतिक-सामाजिक समूहों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
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शिक्षक संगठनों की भूमिका पर नजर
इस सीट के चुनाव में राजनीतिक दलों के साथ शिक्षक संगठनों का प्रभाव भी खास महत्व रखता है। ध्रुव त्रिपाठी की सबसे बड़ी राजनीतिक पृष्ठभूमि शिक्षक राजनीति से ही बनी है। वह लंबे समय तक शर्मा गुट में संगठनात्मक पदों पर रहे हैं और इसी आधार पर लगातार तीन बार एमएलसी निर्वाचित हुए।