जेल सूत्रों के अनुसार इन कैदियों को जेल में लौटने के बाद पैरोल के दौरान बाहर बिताई गई अवधि के बराबर अवधि जेल में बीतानी होगी, जोकि सजा के अतिरिक्त होगी। साथ ही लापता कैदी जितने दिन विलंब से लौटेंगे, उतने दिन की भी अवधि जेल में अतिरिक्त बीतानी होगी। यह पैरोल का नियम है।
जैसे अगर किसी कैदी को सात साल के कारावास की सजा मिली, वह चार साल कैद पूरा कर चुका है और आठ हफ्ते के पैरोल पर गया था। अब समय से जेल लौटने पर निर्धारित सजा के अलावा आठ हफ्ता और जेल में बीतानी पड़ेगी। वहीं लापता कैदी अगर लौटते हैं तो लौटने के समय से जितने दिन बाद वह आए हैं, उन्हें विलंब का दिन माना जाएगा। उन्हें बाकी की सजा के अलावा आठ हफ्ते बाहर बीताए गए पैरोल की अवधि तथा विलंब के दिन अतिरिक्त काटनी होगी।
बाहर के जिलों के भी हैं पैरोल पर छूटे कैदी
पैरोल पर छूटे कैदी गोरखपुुर के विभिन्न थाना क्षेत्रों के अलावा जौनपुर, चित्रकूट, संतकबीरनगर, अररिया, महराजगंज, बलरामपुर, पश्चिमी चंपारण, बिहार, सीवान, बेतिया, दिल्ली, गोंडा आदि जगहों के हैं।
300 से ज्यादा बंदियों को मिली जमानत
जेल में सात साल या उससे कम की सजा के आरोप में बंद करीब 300 विचाराधीन बंदी भी आठ हफ्ते की अंतरिम जमानत पर रिहा हुए थे। अब इन्हें भी कोरोना काल का लाभ मिल गया है। इनमें से अधिकांश बंदियों ने कोर्ट के समक्ष पत्र देकर स्थायी जमानत ले ली है या फिर कुछ समय के लिए और अंतरिम जमानत ले ली है।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. रामधनी ने कहा कि नोटिस भेजकर कैदियों को पैरोल से वापस आने को कहा गया था। केवल तीन कैदी ही लौटे हैं। 23 नहीं लौटे। डीएम, एसएसपी व संबंधित थाने को पत्र भेजा गया है। पुलिस उनका पता लगाकर लाएगी। नहीं आने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।