बस्ती जिले के ओपेक हॉस्पिटल कैली की लिफ्ट में बुधवार देर शाम मिले नरकंकाल की पहचान नहीं हो सकी। इसके लिए कंकाल का नमूना डीएनए जांच के लिए भेजा जाएगा। एएसपी दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि लिफ्ट मरम्मत के दौरान मिले नरकंकाल का डीएनए फोरेंसिक लैब में भेजा जाएगा। जिले की फोरेंसिक टीम व फील्ड यूनिट ने जरूरी साक्ष्य सील किया है।
ओपेक हॉस्पिटल कैली के आर्थोपेडिक वार्ड के पास लगी दो लिफ्ट में इन दिनों मरम्मत का काम चल रहा है। बुधवार शाम मजदूरों ने नर कंकाल देखा। आनन- फानन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर मनोज कुमार को सूचना दी गई। प्राचार्य की सूचना पर थोड़ी ही देर में एएसपी दीपेंद्र नाथ चौधरी, कोतवाल शिवाकांत मिश्रा, सोनूपार चौकी इंचार्ज राम भवन प्रजापति व फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। मौके पर पाया गया कि मृतक के शव का अधिकांश हिस्सा कंकाल में बदल चुका है। नरकंकाल से मिले कुछ कपड़ों और एक बैग को भी साक्ष्य के तौर पर एकत्र किया गया है। पुलिस इस पूरे मामले की छानबीन में जुटी है।
24 साल से बंद था वह हिस्सा
हॉस्पिटल सूत्रों के मुताबिक 1997 के आसपास से लिफ्ट का यह हिस्सा पूरी तरह से पैक था। बंद पड़े उस हिस्से में कभी कोई नहीं गया। ऐसे में माना जा रहा है कि उसी समय का यह शव होगा। एएसपी ने बताया कि उस दौर के गुमशुदगी के दर्ज मुकदमों को भी खंगाला जा रहा है, जिससे मृतक की पहचान को सामने लाया जा सके।
ये है मामला
जिले के महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज से संबंध ओपेक चिकित्सालय कैली में बुधवार को नरकंकाल मिलने से सनसनी फैल गई। अस्पताल प्रशासन की सूचना पर पहुंची पुलिस ने करीब चार साल से बंद पड़ी लिफ्ट से नरकंकाल को निकालकर कब्जे में ले लिया। कोतवाल शिवाकांत मिश्र ने बताया कि फोरेसिंक जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि मौत कब हुई है। पहचान का प्रयास किया जा रहा है। ओपेक चिकित्सालय में मरम्मत का काम चल रहा है। बंद पड़ी लिफ्ट को भी बदला जाना है। काम करते हुए कुछ श्रमिकों ने लिफ्ट को खोलकर नीचे देखा तो उसमें एक नरकंकाल फंसा था। यह देखकर श्रमिक डर गए और अस्पताल के लोगों को जानकारी दी। थोड़ी ही देर में मौके पर भीड़ जमा हो गई। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार की ओर से यह जानकारी कोतवाली पुलिस को दी गई। पुलिस ने बताया कि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि नरकंकाल महिला का है पुरुष का। इन सब का पता जांच के बाद ही चलेगा।