कुछ ऐसे ही हालात में पीपीगंज में मौत के घाट उतारा गया था नवजात
कथित लोकलाज से बचने के लिए नवजात को मौत के घाट उतारने का कुकृत्य हमारे समाज में आदिकाल से होता चला आ रहा है। पाठकों को पता होगा कि एक ऐसा ही मामला, अमर उजाला की कोशिश से पीपीगंज में खुला था। 31 जनवरी 2020 को दर्ज इस मामले की तफ्तीश कैंपियरगंज थाना पुलिस ने की थी। इस मामले में एक प्रभावशाली परिवार के युवक ने एक नाबालिग को हवस का शिकार बनाया था। उससे एक बच्चे का जन्म हुआ।
बिन ब्याही किशोरी मां और उसकी मां ने नवजात को मारकर फेंक दिया था। अमर उजाला की पड़ताल पर सक्रिय हुई पुलिस ने दुष्कर्म के आरोपित, नवजात को मौत के घाट उतारने वाली मां और किशोरी की मां को हत्या के आरोप में 24 फरवरी को गिरफ्तार किया था।
यह थी घटना
तीन जनवरी को बड़हलगंज इलाके के मिश्रौलिया गांव में पोखरे के किनारे अपराह्न करीब 3.30 बजे नवजात बच्ची का शव मिला था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। 72 घंटे बाद हुए पोस्टमार्टम में सिर में चोट से मौत की पुष्टि हुई थी।
यह हो सकती है सजा
- धारा 317: 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे का परित्याग करना (सजा-सात साल व जुर्माना)
- धारा 304: गैर इरादतन हत्या (सजा-आजीवन कारावास)
- धारा 376: दुष्कर्म (आजीवन कारावास या मृत्यु दंड)
- धारा 452: जबरन घर में घुसकर दबाव बनाना (सजा- सात साल व जुर्माना)
- धारा 506: धमकी देना (सजा-दो साल)
नवजात को फेंके जाने के मामले में पुलिस अब भी खाली हाथ
गोरखपुर जिले के गुलरिहा इलाके में नवजात को फेंके जाने के मामले में पुलिस अब भी खाली हाथ ही है। 18 जनवरी शाम सात बजे सियारामपुर में दुर्गा मंदिर के पीछे एक नवजात बच्ची फेंकी हुई मिली थी। पुलिस ने एसएसपी के आदेश पर केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन आज तक इसमें एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई है।
दरअसल, पुलिस को इस प्रकरण की जांच में दिलचस्पी ही नहीं है। यही वजह है कि घटना के करीब एक महीने का समय बीतने वाला है, लेकिन पुलिस कुछ नहीं कर सकी है। हालांकि, केस के विवेचक व चौकी प्रभारी सरहरी शैलेंद्र शुक्ल का कहना है कि आशा और ग्रामीणों से पूछताछ कर जांच की जा रही है। चुनाव में ड्यूटी लगने से स्टॉफ की कमी की वजह से भी थोड़ी देरी हुई है। जल्द ही जांच पूरी कर पर्दाफाश किया जाएगा।