डेढ़ घंटे की देरी होती तो पुलिस की पकड़ से बाहर निकल जाते
इस मामले में पुलिस और एसटीएफ का नेटवर्क ठीक होने की वजह से ही सॉल्वर गैंग पकड़ा जा सका। अगर उन्हें डेढ़ घंटे का समय मिल गया होता तो वे आसानी से अपना काम कर निकल गए होते। सटीक सूचना पर पहुंची पुलिस ने परीक्षा शुरू होने से पहले ही इन साॅल्वरों को हिरासत में ले लिया। आशंका है कि गोरखपुर में आए साॅल्वरों को बिहार के कोचिंग सेंटर से बुलाया गया होगा। इसके पहले ग्राम पंचायत अधिकारी चयन परीक्षा में हुई सॉल्वरों की गिरफ्तारी में बिहार कनेक्शन की पुष्टि हुई थी। इनके भी तार पटना के कोचिंग से जुड़े बताए जा रहे हैं।
इनकी हुई थी गिरफ्तारी
17 फरवरी को शशिभूषण कुमार सौरबाजार सहरसा, बिहार (सॉल्वर), अंजनी कुमार उर्फ मनीष कुमार सिंह नेवादा, बिहार (सॉल्वर), विकास कुमार यादव, जगदीशपुर सुखा बक्सर बिहार (सॉल्वर), धीरेंद्र कुमार, पुराना हरिहरपुर, भोजपुर आरा (सॉल्वर), बलिराम कुमार, टिकरिया गुलरिहा गोरखपुर (अभ्यर्थी), दुर्गेश यादव मंझगांवा जगतबेला थाना चिलुआताल (अभ्यर्थी) को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। ये साॅल्वर रुपये लेकर परीक्षा दे रहे थे।
एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि परीक्षा में साॅल्वर और अभ्यर्थी गिरफ्तार कर जेल भिजवाए जा चुके हैं। बायोमीट्रिक कंपनी के कर्मचारी की तलाश में पुलिस टीम लगी है। जल्द ही उसको भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।