पूर्वोत्तर रेलवे के बाराबंकी से बस्ती स्टेशन के बीच मई से एक ही पटरी पर आगे-पीछे ट्रेनें दौड़ने लगेंगी। इसके लिए ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम का काम अप्रैल में पूरा हो जाएगा। इस व्यवस्था के लागू होने से ट्रेनों की सुरक्षा के साथ-साथ औसत गति में भी तेजी से सुधार आएगा। इससे यात्रियों की मुश्किलें भी कम होंगी।
अभी रेल खंडों पर एब्सोल्यूट ब्लॉक सिग्नल सिस्टम चल रहा है। इसके तहत एक ब्लॉक सेक्शन में ट्रेन के अगले स्टेशन पर पहुंचने के बाद पीछे से आने वाली ट्रेन को हरा सिग्नल दिया जाता है। दो ट्रेनों के बीच आठ से दस किलोमीटर की दूरी होती है। इस वजह से पीछे से आने वाली ट्रेनें देरी की शिकार होती हैं।
सिग्नल के इंतजार में ट्रेनें खड़ी कर दी जाती हैं, लेकिन अब इस सिस्टम में सुधार कर ऑटोमेटिक ब्लाॅक सिग्नलिंग सिस्टम के तहत ट्रेनों का संचालन होना है। वहीं, ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम के तहत प्रत्येक एक किलोमीटर पर एक ब्लॉक बनेगा। ट्रेन जब एक ब्लॉक पार करेगी तो उसके पीछे की ट्रेन को ग्रीन सिग्नल मिल जाएगा।
इस तरह से एक के पीछे एक ट्रेन चलाई जा सकेगी। इस सिस्टम में सिग्नल भी बढ़ जाएगा। पहले लाल फिर डबल, पीला फिर हरा सिग्नल दिखेगा। हर दो ब्लॉक के बीच एक हट बनाए जाएंगे। हट में सिग्नल से जुड़े संयंत्र रखे जाएंगे, ताकि सिग्नल में कोई फाल्ट आए तो तत्काल ठीक कर लिया जाए।