बिन ब्याही मां की उम्र को लेकर भ्रम
बच्ची को जन्म देने वाली लड़की वयस्क है या अवयस्क, अभी यह तय होना बाकी है। यदि वह अवयस्क है तो भले ही संबंध सहमति से बने हो, मामला दुष्कर्म का ही माना जाएगा। यदि लड़की बालिग है तो उसके बयान पर आगे सारा दारोमदार है। यदि उसने आपसी सहमति से शारीरिक रिश्ते बनाने की बात कुबूली तो समझो युवक बच गया, अगर जबरन संबंध बनाने का आरोप लगाया तो फिर युवक की जिंदगी जेल में ही कटनी तय है।
गले के नीचे नहीं उतर रहा जन्म देने वाली मां का बयान
बकौल पुलिस, लड़की ने नवजात की मौत को लेकर जो बयान दिया है, उसके मुताबिक वह नर्सिंग होम से बिना बताए निकल गई थी। बच्ची उसके गोद में थी और दर्द से परेशान होने की वजह से संभाल नहीं पा रही थी। रास्ते में अचानक लड़खड़ा कर गिर जाने की वजह से बच्ची की मौत हो गई। युवती के इस बयान से पुलिस संतुष्ट हो सकती है, लेकिन यह सच से परे है।
महिला रोग विशेषज्ञ भी इस बात से सहमत हैं कि प्रसव के तुरंत बाद पैदल चलना आसान नहीं होता। इस पर बच्ची को गोद में लेकर आधे घंटे पहले प्रसूता बनी लड़की का चलना, यह तो बिल्कुल समझ से परे है। इस हिसाब से अब सवाल यह है कि अगर इस घटनाक्रम को सही मान लें तो बच्ची को चोट लगने पर उसे बचाने की कोशिश क्यों नहीं गई? उसे अस्पताल क्यों लेकर नहीं गए? यह तय किए बिना की वह वाकई मर गई या नहीं, उसे पोखरे के पास फेंक आना कहां तक सही है? ये तमाम सवाल हैं, जो इस बात को साबित करते हैं कि बच्ची की मौत को महज खुद के बचाने के लिए हादसा दर्शाने की कोशिश की जा रही है। अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले में सचाई सामने लाती है या फिर वह भी गुमराह करके मामले को रफा-दफा कर देना चाहती है।
दरअसल, युवती के साथ उसकी मां भी थी। असलियत यह है कि प्रसव के बाद बच्ची को युवती की मां ने ही गोद में ले रखा था। नर्सिंग होम से निकलने से लेकर मौका-ए-वारदात पर पहुंचने तक।
यह थी घटना
तीन जनवरी को बड़हलगंज इलाके के मिश्रौलिया गांव में पोखरे किनारे एक नवजात बच्ची का शव मिला था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। 72 घंटे बाद हुए पोस्टमार्टम में सिर में चोट से नवजात के मौत की पुष्टि हुई है। वहीं, पुलिस ने इस मामले में भाजयुमो नेता रुद्रेश तिवारी की तहरीर पर केस भी दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।