गोरखपुर। चौरीचौरा में पुलिसवालों को कुचलने की कोशिश करते हुए बैरिकेडिंग तोड़कर भागे पिकअप सवार पशु तस्करों की जांच में जुटी पुलिस को अहम सुराग हाथ लगे हैं। जेल भेजे गए लोनी गैंग के पशु तस्करों को चौरीचौरा क्षेत्र का रहने वाला आबाद उन्हें फाइनेंस करता था।
जांच में सामने आया है कि आबाद तस्करी में सीधे तौर पर शामिल न होकर आर्थिक मदद, संरक्षण और स्थानीय स्तर पर नेटवर्क मैनेजमेंट का काम करता था। पुलिस टीम उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। फिलहाल आरोपी का मोबाइल बंद है।
चौरीचौरा में पुलिसवालों को कुचलने की कोशिश करते हुए बैरिकेडिंग तोड़कर भागे लोनी गैंग के सरगना संजय समेत छह पशु तस्करों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया। वहीं दो अन्य तस्करों की तलाश में दबिश दे रही है। आरोपियों से पूछताछ और मोबाइल कॉल डिटेल के जरिये चौरीचौरा थानाक्षेत्र के रहने वाले आबाद का नाम सामने आया। आरोप है कि वह लोनी गैंग के अलावा अंतरजनपदीय गिरोह के तस्करों को गाड़ियों की व्यवस्था, अग्रिम रकम और जरूरत पड़ने पर कानूनी मदद उपलब्ध कराता था। इतना ही नहीं, मार्ग में पड़ने वाले संवेदनशील बिंदुओं की जानकारी भी उसके नेटवर्क के जरिये तस्करों तक पहुंचाई जाती थी।
फाइनेंस से लेकर रूट मैनेजमेंट तक सक्रिय भूमिका
जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आबाद तस्करी में प्रयुक्त वाहनों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, ड्राइवरों की व्यवस्था करने और पकड़ में आने की स्थिति में जमानत की व्यवस्था तक करता था। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या उसके नेटवर्क में परिवहन से जुड़े लोग या स्थानीय स्तर पर अन्य सहयोगी शामिल थे। पुलिस अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि आबाद का स्थानीय स्तर पर किस तरह का प्रभाव था और वह किस तंत्र के जरिये अपने नेटवर्क को संचालित करता था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि कुछ लोग उसकी गतिविधियों की जानकारी पहले से उपलब्ध कराते थे, जिससे तस्कर मार्ग बदल लेते थे। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि तस्करों को किन-किन खातों के जरिये रुपये दिया जा रहा था।
मामले में तस्करों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई करते हुए अपराध से अर्जित की गई उनकी संपत्ति भी जब्त की जाएगी। इसके साथ ही संबंधित थानों को भी सतर्क कर दिया गया है।
- दिनेश पुरी, एसपी उत्तरी