विनय सिंह के पकड़े जाने के बाद साफ हो गया है कि घटना के बाद आरोपी कहीं भी फरार नहीं हुए थे। सीडीआर से पता चला है कि वह रात उसी इलाके में गुजारे थे। कुछ दारोगा पुत्र प्रिंस के घर में सोए थे, कुछ आसपास के इलाके में मौजूद थे। शुभम सिंह सिंघाड़ा और अविनाश के बीच मारपीट होने के बाद जिस घटना की पुलिस को सूचना मिली थी, उसमें भी पुलिस ने यूं ही समझौता नहीं कराया था। पता चला है कि उस मामले में पुलिस वालों की ही पैरवी आई थी, जिसके बाद चौकी इंचार्ज समझौता कराने पर राजी हो गए थे।
बताया तो यह भी जा रहा है कि यहां से स्थानांतरण पर बाहर जा चुके एक पुलिस अफसर से पवन सिंह के नजदीकी रिश्ते हैं, जिनकी पैरवी भी आई थी। यह पैरवी भी विनय सिंह ने ही कराई थी। इस पूरे प्रकरण में पुलिस की किरकिरी होने की वजह से एसएसपी खुद मॉनीटरिंग कर रहे हैं। पुलिस वालों की भूमिका संदेह के घेरे में आने के बाद से ही उन्होंने जांच का भी आदेश दे दिया है। पुलिस कॉल डिटेल के जरिए उन पुलिस वालों तक पहुंचना चाहती है, जो बदमाशों के मददगार बने हुए हैं।
एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि पुलिस एक-एक बिंदु पर काम कर रही है। पुलिस वालों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। कोई आरोपी बच नहीं पाएगा। शरणदाता भी जेल भेजे जाएंगे। कोशिश यही है कि इस मामले में ऐसी कार्रवाई की जाए कि कोई भी दोबारा ऐसी हिम्मत ना कर सके। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।