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इस वजह से गोलियों से भूने गए थे दो चचेरे भाई, जानिए कैसे बनाई गई थी हत्या की साजिश

Sun, 31 May 2020 08:17 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

  • वर्चस्व की जंग में हुई थी चचेरे भाइयों की हत्या
  • दो ग्रुप बनाकर वर्चस्व कायम करने जा रहे थे युवक
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पुलिस के गिरफ्त में आरोपित। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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झंगहा इलाके के गोर्रा नदी के किनारे चचेरे भाइयों दिवाकर और कृष्णा की गोली मारकर हत्या में शामिल छह बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। वहीं इनको शरण देने के आरोप में तीन लोगों को भी गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में पता चला कि युवकों के दो ग्रुप में आपसी वर्चस्व की जंग में हत्या की गई थी।

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पुलिस ने पकड़े गए आरोपितों के पास से तीन पिस्टल, एक तमंचा और कारतूस भी बरामद किया है। हत्या में शामिल तीन और बदमाशों की तलाश में पुलिस टीम गठित की गई है।
 
एसपी नार्थ अरविंद कुमार पांडे व सीओ क्राइम प्रवीण सिंह ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि 24 मई की दोपहर शराब की दावत के दौरान चचेरे भाइयों की हत्या की गई थी। केस दर्ज कर पुलिस जांच में लगी थी कि पता चला कि दो युवक अमन पटेल, अमिष ने हत्या की साजिश रची थी।
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दिवाकर और कृष्णा एक ग्रुप चलाते थे और आरोपित भी अपना ग्रुप बनाए थे। इन दोनों के बीच में वर्चस्व का विवाद चल रहा था। दावत में अमन, सत्यम भी शामिल था। ये दोनों ही ग्रुप से जुड़े हुए थे और इनकी ही सूचना पर आए लोगों ने गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। नामजद आरोपित बनाया गया मुकेश बेगुनाह पाया गया है। उसे पुलिस ने छोड़ दिया।

इनकी हुई है गिरफ्तारी

खोराबार के जंगल रामलखना निवासी अमन पटेल उर्फ गोलू, अमिष सिंह उर्फ विवेक, झंगहा के गहिरा चौबे टोला निवासी अभिषेक उर्फ निशू चौबे, मोतीराम अड़्डा के कोइरान टोला निवासी सत्यम यादव, झंगहा के बरगदवां निवासी अनिकेत उर्फ विशाल, खोराबार के नौवा अव्वल निवासी अभिजीत यादव के अलावा शरणदाता खोराबार के पूछिया निवासी शशि कुमार, जंगल रामलखना निवासी राणा प्रताप सिंह और गजपुर के सोनू उर्फ शिवाजी की गिरफ्तारी की गई है।
 
महाकाल और महादेव नाम से बनाए थे ग्रुप
युवकों ने महाकाल और महादेव नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था। आपस में मारपीट होने की सूचना इसी ग्रुप में चलती थी और फिर सभी सदस्य एकजुट होकर दूसरे ग्रुप पर हमला कर देते थे। पुलिस इन दोनों ग्रुप से जुड़े सभी लोगों की तलाश शुरू कर दी है। उधर, ग्रुप का नाम प्रकाश में आते ही इसके सदस्य रविवार की सुबह ही लेफ्ट होकर बाहर चले गए हैं मगर सभी के नंबर पुलिस को मिल गए हैं।
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गाड़ी की वजह से साथ गया था मुकेश

डबल मर्डर में पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकेश को भी आरोपित बनाया था। यह माना जा रहा था कि मुकेश ने ही मुखबिरी की होगी। मगर जांच में पता चला है कि मुकेश के ऊपर भी हमला हुआ था वह खुद वहां से जान बचाकर भागा था और रास्ते में चरवाहों को भी बताया था। पुलिस की जांच में अभी तक जो साक्ष्य आए हैं उसमें मुकेश मुल्जिम नहीं पाया गया है। इस वजह से उसे छोड़ दिया गया है।
 
कई और भी शरणदाता जांच के दायरे में
हत्या के बाद सभी झंगहा इलाके के एक ईंट भट्ठे पर गए थे और फिर वहीं से फरार हुए थे। पुलिस ने तीन शरणदाताओं को तो दबोच लिया है लेकिन कई और हैं जिनके नाम सामने आए हैं। पुलिस उन सभी के खिलाफ साक्ष्य जुटा रही है ताकि उन पर भी कार्रवाई की जा सके।
 
पिस्टल कहां से आया इसकी भी होगी जांच
सीओ क्राइम प्रवीण सिंह ने बताया कि पिस्टल बरामद तो कर लिया गया है लेकिन बदमाशों को यह कहां से मिला है इसकी जांच अभी बाकी है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है। कोई भी बचने नहीं पाएगा। सभी पर कार्रवाई की जाएगी।
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