खोराबार के जंगल रामलखना निवासी अमन पटेल उर्फ गोलू, अमिष सिंह उर्फ विवेक, झंगहा के गहिरा चौबे टोला निवासी अभिषेक उर्फ निशू चौबे, मोतीराम अड़्डा के कोइरान टोला निवासी सत्यम यादव, झंगहा के बरगदवां निवासी अनिकेत उर्फ विशाल, खोराबार के नौवा अव्वल निवासी अभिजीत यादव के अलावा शरणदाता खोराबार के पूछिया निवासी शशि कुमार, जंगल रामलखना निवासी राणा प्रताप सिंह और गजपुर के सोनू उर्फ शिवाजी की गिरफ्तारी की गई है।
महाकाल और महादेव नाम से बनाए थे ग्रुप
युवकों ने महाकाल और महादेव नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था। आपस में मारपीट होने की सूचना इसी ग्रुप में चलती थी और फिर सभी सदस्य एकजुट होकर दूसरे ग्रुप पर हमला कर देते थे। पुलिस इन दोनों ग्रुप से जुड़े सभी लोगों की तलाश शुरू कर दी है। उधर, ग्रुप का नाम प्रकाश में आते ही इसके सदस्य रविवार की सुबह ही लेफ्ट होकर बाहर चले गए हैं मगर सभी के नंबर पुलिस को मिल गए हैं।
डबल मर्डर में पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकेश को भी आरोपित बनाया था। यह माना जा रहा था कि मुकेश ने ही मुखबिरी की होगी। मगर जांच में पता चला है कि मुकेश के ऊपर भी हमला हुआ था वह खुद वहां से जान बचाकर भागा था और रास्ते में चरवाहों को भी बताया था। पुलिस की जांच में अभी तक जो साक्ष्य आए हैं उसमें मुकेश मुल्जिम नहीं पाया गया है। इस वजह से उसे छोड़ दिया गया है।
कई और भी शरणदाता जांच के दायरे में
हत्या के बाद सभी झंगहा इलाके के एक ईंट भट्ठे पर गए थे और फिर वहीं से फरार हुए थे। पुलिस ने तीन शरणदाताओं को तो दबोच लिया है लेकिन कई और हैं जिनके नाम सामने आए हैं। पुलिस उन सभी के खिलाफ साक्ष्य जुटा रही है ताकि उन पर भी कार्रवाई की जा सके।
पिस्टल कहां से आया इसकी भी होगी जांच
सीओ क्राइम प्रवीण सिंह ने बताया कि पिस्टल बरामद तो कर लिया गया है लेकिन बदमाशों को यह कहां से मिला है इसकी जांच अभी बाकी है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है। कोई भी बचने नहीं पाएगा। सभी पर कार्रवाई की जाएगी।