गोरखपुर। शहर के एक निजी क्लब के सभागार में शनिवार को हास्य, व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताओं की महफिल सजी। एक नई आशा की ओर से आयोजित चतुर्थ वर्ष के हास्य कवि सम्मेलन में देश के अलग-अलग शहरों से आए कवियों ने देर रात तक अपनी रचनाएं सुनाईं। हास्य के बीच कविताओं में बदलते संस्कार, मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल, भारतीय संस्कृति और नारी सम्मान जैसे मुद्दे भी उठे।
कार्यक्रम की शुरुआत गुरु वंदना और गुरु पूजन से हुई। इसके बाद विधायक ग्रामीण विपिन सिंह, एडीजी रामकुमार, डीआईजी एस. चन्नप्पा और एसपी साउथ दिनेश कुमार पुरी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संस्था की अध्यक्ष डॉ. निशी अग्रवाल ने अतिथियों, कवियों और श्रोताओं का स्वागत किया। अनूप बंका और सुनयना बंका ने मंच संचालन किया।
संस्कार, मोबाइल और संस्कृति पर कवियों ने साधा निशाना
महेश दुबे ने बदलते सामाजिक मूल्यों और संस्कारों पर व्यंग्य किया। उन्होंने कहा, “है उल्लास गायब, व्यथा कह रहे हैं, वे संस्कारों को कुप्रथा कह रहे हैं..”। उनकी रचना ने सामाजिक बदलाव पर श्रोताओं को सोचने का मौका दिया।
डॉ. अनिल चौबे ने भारतीय संस्कृति और रामायण की परंपरा पर रचना सुनाते हुए कहा, “धन्य है भारत देश जहां पर काग भी रामकथा करते हैं।” वहीं सुरेश अलबेला ने मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर परिवार में आए बदलाव पर हास्य के जरिए चोट की। उनकी प्रस्तुति “इस मोबाइल ने सारा परिवार तोड़ कर रख दिया” पर सभागार ठहाकों से गूंज उठा।
नारी सम्मान की कविता ने गंभीर किया माहौल
डॉ. भुवन मोहिनी ने नारी सम्मान, मर्यादा और सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उनकी पंक्तियां “तना हो सर पे जब छप्पर तो सावन क्या बिगाड़ेगा... दुपट्टा हो बदन पे जो दुशासन क्या बिगाड़ेगा...सुनकर सभागार में तालियां गूंजीं। कवियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। देर रात तक चले सम्मेलन का समापन नमामि अग्रवाल के आभार के साथ हुआ।