योजना का सर्वाधिक लाभ छोटे भू-खंडों पर बने भवनों में रहने वालों को मिलेगा। 300 वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल के मकान का मानचित्र स्वत: स्वीकृत हो जाएगा। इसके लिए भवन स्वामी को आर्किटेक्ट से तय शर्तों के तहत मानचित्र, शमन शुल्क आदि जीडीए में जमा करना होगा। जीडीए इन मानचित्रों को स्वीकृत तो कर देगा, लेकिन बाद में ऐसे सभी मामलों का सर्वे भी होगा। सर्वे में तथ्य गलत मिले तो भवन स्वामी के साथ ही आर्किटेक्ट के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
योजना के तहत 3000 वर्ग मीटर में बने आवासीय यूनिट को वैध किया जा सकेगा, लेकिन शर्त यह होगी कि इसका भू-प्रयोग आवासीय हो। इसके साथ ही प्राधिकरण, शमन शुल्क लेकर मकान में अतिरिक्त फ्लोर की भी अनुमति दे सकेगा। हालांकि इसके लिए भूकंप रोधी और अग्निशमन विभाग की एनओसी जरूरी है। एकल आवास में मल्टी यूनिट को अभी तक मंजूरी नहीं दिया जाता था। नई नीति में एकल आवास में कई यूनिट को वैध किया जा सकेगा।
व्यावसायिक हो सकेंगे आवासीय निर्माण
आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर प्राधिकरण की तरफ से लगातार कार्रवाई की जाती है। अब आवासीय निर्माण को सशर्त व्यावसायिक उपयोग की अनुमति दी जा सकेगी। इसके लिए जीडीए में इम्पैक्ट शुल्क आदि जमा करना होगा। भवन स्वामी को पार्किंग से लेकर अन्य सुविधा देनी होगी। नई शमन नीति से सर्वाधिक लाभ उन लोगों को मिलेगा, जिनके व्यावसायिक भवन जीडीए के पेंच से खंडहर बने हुए हैं। कामर्शियल भवनों में पार्किंग को लेकर भी सहूलियत मिलेगी।
प्राधिकरण क्षेत्र के 25 अवैध कॉलोनियों के लोगों को फिलहाल इस योजना के तहत राहत नहीं मिलेगी। ये कॉलोनियां तय भू-प्रयोग के विपरीत विकसित की गई हैं। इनमें ईस्टर्नपुर कॉलोनी, आर्यनगर, विवेकानंदपुरी, श्रीराम नगर कॉलोनी, गायत्री नगर, लालगंज, झरना टोला, मौर्या टोला, नंदानगर दरगहिया, सैनिक कुंज, सैनिक विहार विस्तार, विवेकानंद नगर, आदर्श नगर कॉलोनी, विवेक नगर, शांति नगर, मुलायम नगर, गोरक्षनगरी, महादेवपुरम बशारतपुर पूर्वी, शक्ति नगर, शिवाजी नगर, शक्तिनगर, शुभम कॉलोनी, राजीव नगर, पार्वती नगर, साकेत नगर व सिद्धार्थनगर शामिल हैं।
जीडीए सचिव राम सिंह गौतम ने बताया कि नई शमन नीति से अवैध निर्माण वैध हो सकेंगे। कम शुल्क में लोग अपने मकानों को वैध करा सकेंगे। मंगलवार से लोग अवैध निर्माण को वैध कराने को लेकर आवेदन कर सकते हैं। इस संबंध में किसी भी तरह की जानकारी हासिल करने के लिए भी लोग प्राधिकरण में संपर्क कर सकते हैं। इस योजना का लाभ भू-प्रयोग की अनदेखी कर बसी अवैध कॉलोनियों को नहीं मिलेगा। इन्हें वैध करने के लिए शासन में अलग से प्रयास चल रहा है।