डॉ अमित शाही ने बताया कि उनके पास कई ऐसे केस आए जो इंटरनेट के उपचार पर भरोसा करते हैं, लेकिन जब मामला बिगड़ जाता है, तब डॉक्टरों के पास पहुंचते हैं। ऐसे लोगों को इंटरनेट पर ज्यादा भरोसा रहता है। जबकि, जरूरी नहीं कि इंटरनेट पर हर जानकारी सही ही हो। इसलिए ऐसे मरीजों को सलाह दी जाती है कि वे इंटरनेट इलाज के तरीके बिल्कुल न ढूंढे। क्योंकि, इंटरनेट केवल सूचना के लिए ठीक है। इलाज के लिए बिल्कुल भरोसा न करें।
केस एक- इंटरनेट ने बताया मुंह का कैंसर, निकला छाला
24 साल के एक युवक के मुंह में जख्म हो गया। काफी समय से ठीक हो नहीं हो रहा था। युवक ने इंटरनेट पर लक्षण के आधार पर दवा खोजी। इंटरनेट पर जो जानकारी मिली उसके हिसाब से युवक को मुंह का कैंसर था। घबराया युवक जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ एनके वर्मा के पास पहुंचा। जांच की गई तो पता चला कि कोई गंभीर बीमारी नहीं है। छाले की वजह से जख्म हो गया था। इलाज से वह ठीक हो गया।
केस दो- लत थी मोबाइल की, बता दिया मानसिक रोगी
21 साल के एक युवक के सिर में काफी दिनों से दर्द था। साथ ही उसे नींद न आने की शिकायत थी। इस पर उसने इंटरनेट पर इलाज ढूंढना शुरू किया। लक्षण के आधार पर निष्कर्ष निकला कि वह मानसिक रोगी हो गया है। कई दिनों तक बेचैन रहने के बाद युवक ने जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित शाही से परामर्श लिया। जांच में पता चला कि वह मोबाइल का इस्तेमाल अधिक करता है। इसकी वजह से उसे यह समस्या थी। डॉक्टर ने मोबाइल कम इस्तेमाल करने की सलाह दी। युवक की समस्या दूर हो गई।