सिविल लाइंस निवासी संगम कुमार ने सोशल मीडिया के जरिए ऑनलाइन ब्लूट्रूथ बुक कराया था। उन्होंने 1600 रुपये का भुगतान कर दिया था। उनका पैकेट आया। उसमें दूसरा ब्लूट्रूथ निकला, जो महज 350 रुपये का था। इसे वापस कराने के लिए उन्होंने शिकायत की तो कस्टमर केयर से बताया गया कि इसे वापस कर लिया जाएगा। बाद में कोई नहीं पहुंचा, जिससे उनकी रकम डूब गई। उनकी शिकायत पर साइबर सेल ने जांच की।
केस दो
शाहपुर की रहने वाली साधना ने 5500 रुपये की आर्टिफिशियल ज्वेलरी मंगाई। उन्होंने फेसबुक पर एक विज्ञापन देखा था। कंपनी की ओर से जब कुरियर आया तो उन्होंने सामान चेक किया। रेती बाजार में गईं तो पता लगा कि वह सामान 300 रुपये का है। उन्होंने उसे वापस करने का प्रयास किया तो कंपनी ने कोई मदद नहीं की। उनकी शिकायत पर जब जांच हुई तो पता लगा कि फर्जी वेबसाइट के जरिए सामान बेचा जा रहा था। बाद में उन्होंने ही केस बंद करने को कह दिया।
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- कोई भी वेबसाइट खोलने के पहले यूआरएल की जांच करें।
- हर वेबसाइट का प्रमाणपत्र होता है। उसकी भी पड़ताल करें।
- किसी भी कंपनी के बारे में गूगल पर जानकारी लें।
- कंपनी की साइट पर पता इत्यादि न दिखें तो खरीदारी न करें।
- कॉपीराइट से भी कंपनी की जानकारी मिलती है, उसे भी देख लें।
एसपी सिटी कृष्ण कुमार विश्नोई ने कहा कि सोशल मीडिया पर खरीदारी के लिए लुभावने विज्ञापन आते हैं। इनके झांसे में आकर लोग ठगी के शिकार हो जाते हैं। ऐसे मामले अक्सर सामने आते हैं। इसलिए सोच समझकर खरीदारी करें। लालच में पड़ने पर नुकसान उठाना पड़ सकता है।